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दैनिक आचार📜 भक्ति परंपरा, धर्मसिंधु1 मिनट पठन

मासिक धर्म में मंत्र जप करना चाहिए या नहीं

संक्षिप्त उत्तर

मानसिक जप = सदैव अनुमत (सर्वसम्मत)। माला जप = कुछ में वर्जित। श्रवण = अनुमत। भगवान भाव देखते हैं — मन में ईश्वर स्मरण कभी वर्जित नहीं, किसी भी अवस्था में।

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विस्तृत उत्तर

मानसिक जप = सदैव अनुमत। इसमें कोई विवाद नहीं।

विस्तार

  1. 1मन में जप — ईश्वर नाम, मंत्र, भजन — मन में कभी वर्जित नहीं। 'कलियुग केवल नाम अधारा' — नाम स्मरण सदैव शुभ।
  2. 2माला से जप — कुछ परंपरा में वर्जित (माला स्पर्श = पूजा सामग्री); कुछ में अनुमत।
  3. 3मुखर (बोलकर) जप — कुछ परंपरा में वर्जित; कुछ में अनुमत।
  4. 4गीता/रामायण पाठ — श्रवण (सुनना) = सदैव अनुमत। पुस्तक स्पर्श = कुछ में वर्जित।

सर्वसम्मत: मन में ईश्वर स्मरण = सदैव, सभी अवस्थाओं में, सभी परंपराओं में अनुमत और शुभ। भगवान भाव देखते हैं, शरीर की अवस्था नहीं।

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शास्त्रीय स्रोत
भक्ति परंपरा, धर्मसिंधु
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