विस्तृत उत्तर
गरुड़ पुराण में नरक में भोजन के विषय में जो वर्णन मिलता है वह अत्यंत दारुण है। पापी जीव को नरक में भोजन के स्थान पर यातना मिलती है।
गरुड़ पुराण में वर्णित है कि यममार्ग पर और नरक में जीव भूख-प्यास से अत्यंत व्याकुल रहता है। पापी जीव जब रास्ते में दानी आत्माओं को भोजन पाते देखता है और उनसे कुछ माँगने की चेष्टा करता है, तो यमदूत उसे रोक देते हैं और कहते हैं — 'तुमने दान नहीं किया, इसलिए तुम्हें कुछ नहीं दिया जाएगा।'
नरक में पापी जीव को जो 'भोजन' मिलता है वह वास्तव में उसकी यातना है — रक्त वमन करवाकर उसे पीने पर विवश करना, मल-मूत्र को खाने के लिए बाध्य करना, जहरीले द्रव को पिलाना।
गरुड़ पुराण में भूख-प्यास की यातना को एक विशेष दंड के रूप में वर्णित किया गया है। जिसने जीवन में दूसरों को भोजन और जल नहीं दिया — जो अन्न और जल का दान नहीं किया — उसे नरक और यममार्ग दोनों पर यही कष्ट सबसे अधिक भोगना पड़ता है।
इसीलिए अन्नदान को इतना महत्व दिया गया है।





