लोकमहर्लोक में रोग, बुढ़ापा और भूख क्यों नहीं होती?महर्लोक विशुद्ध सत्त्वगुण से आच्छादित है जहाँ रजोगुण और तमोगुण का प्रवेश नहीं। इसलिए यहाँ रोग, बुढ़ापा, भूख, थकावट और क्रोध का पूर्णतः अभाव है।#महर्लोक#रोग#बुढ़ापा
लोकजनलोक में भूख और प्यास होती है क्या?नहीं, जनलोक में भूख और प्यास जैसे भौतिक क्लेशों का भय नहीं होता।#जनलोक#भूख#प्यास
जीवन एवं मृत्युप्रेत को भोजन न मिलने पर क्या होता है?प्रेत को भोजन न मिलने पर — असहनीय भूख की पीड़ा, यात्रा में असमर्थता, वैतरणी में रक्त-पान को विवश और यात्रा न कर पाने से दीर्घ भटकन। गरुड़ पुराण में यही दुर्दशा बताई गई है।#प्रेत#भोजन#भूख
जीवन एवं मृत्युपिंडदान से प्रेत की भूख कैसे शांत होती है?पिंडदान का सूक्ष्म अंश प्रेत की यातना-देह तक पहुँचता है। यह उसकी वासना-जनित भूख को कम करता है। 'प्रेत को क्षुधा-तृष्णा निवारण के लिए पिंडादि प्रदान किए जाते हैं' — यह गरुड़ पुराण का वचन है।#पिंडदान#भूख#प्रेत
जीवन एवं मृत्युप्रेत को भूख क्यों लगती है?प्रेत को भूख इसलिए लगती है क्योंकि वह अपनी वासनाएँ और इच्छाएँ शरीर के साथ लेकर जाता है। 'आत्मा शरीर त्यागने पर भूख-प्यास का अनुभव करती है' — यही गरुड़ पुराण का वर्णन है। पिंडदान इसे कम करता है।#प्रेत#भूख#वासना
जीवन एवं मृत्युयममार्ग में पिंडदान के अभाव में जीव क्या खाता है?पिंडदान के अभाव में यममार्ग पर जीव को कुछ नहीं मिलता। वैतरणी में भूख-प्यास से व्याकुल होकर वह रक्त-मांस युक्त नदी का जल पीने पर विवश होता है। इसीलिए पिंडदान अनिवार्य बताया गया है।#यममार्ग#पिंडदान#भूख
जीवन एवं मृत्युक्या नरक में जीव को भोजन मिलता है?नरक में जीव को सात्विक भोजन नहीं मिलता। भूख-प्यास की यातना होती है। रक्त-वमन पीने, मल खाने और जहर पीने पर विवश किया जाता है। जिसने जीवन में अन्नदान नहीं किया उसे यह कष्ट सर्वाधिक होता है।#नरक#भोजन#भूख
जीवन एवं मृत्युयममार्ग में भूख-प्यास का क्या प्रभाव होता है?गरुड़ पुराण के अनुसार यममार्ग पर भूख-प्यास की तीव्र पीड़ा होती है जो सूक्ष्म शरीर में होती है। पिंडदान से यह कुछ कम होती है। जिसने जीवन में अन्न-जल दान किया हो, उसे कम कष्ट होता है। यह दान के महत्व को रेखांकित करता है।#यममार्ग#भूख#प्यास
भक्ति एवं पूजाभगवान को भोग क्यों लगाते भूख नहीं लगतीभगवान को नहीं, भक्त को आवश्यकता। कृतज्ञता — 'आपका दिया, पहले आप।' गीता 3.13 — अर्पित भोजन पाप मुक्त। भोजन→प्रसाद (दैवी ऊर्जा)। अहंकार तोड़ता, संयम सिखाता।#भोग#भगवान#भूख