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प्रेत को भोजन न मिलने पर क्या होता है?

गरुड़ पुराण में प्रेत को भोजन न मिलने की स्थिति का वर्णन अत्यंत करुणाजनक है।

संक्षिप्त उत्तर

प्रेत को भोजन न मिलने पर — असहनीय भूख की पीड़ा, यात्रा में असमर्थता, वैतरणी में रक्त-पान को विवश और यात्रा न कर पाने से दीर्घ भटकन। गरुड़ पुराण में यही दुर्दशा बताई गई है।

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विस्तृत उत्तर

गरुड़ पुराण में प्रेत को भोजन न मिलने की स्थिति का वर्णन अत्यंत करुणाजनक है।

भूख की तीव्र पीड़ा — प्रेत वासनामय शरीर में है। उस शरीर में भूख की वासना प्रबल है। भोजन न मिलने पर यह पीड़ा असहनीय हो जाती है।

यात्रा में असमर्थता — गरुड़ पुराण में यमलोक की यात्रा 86,000 योजन की बताई गई है। इस दीर्घ यात्रा के लिए शक्ति चाहिए। भोजन न मिलने पर प्रेत दुर्बल और असमर्थ हो जाता है।

तृप्ति का अभाव — गरुड़ पुराण के प्रथम अध्याय में कहा गया है — 'वह पातकी प्राणि पुत्रों से दिए हुए पिण्ड को प्राप्त करता है तो भी उस नास्तिक को तृप्ति नहीं होती।' जो परम पापी हो, उसे मिलने पर भी तृप्ति नहीं होती।

वैतरणी में रक्त-पान — भोजन से वंचित प्रेत वैतरणी नदी में भूख-प्यास से व्याकुल होकर उस नदी के रक्त-मांस-मवाद युक्त जल से ही तृप्त होने को विवश होता है।

दीर्घ भटकन — भोजन-विहीन प्रेत यात्रा नहीं कर सकता, यमलोक नहीं पहुँच सकता। वह वहीं भटकता रहता है जहाँ वह अटका है।

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