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प्रेत प्रश्नोत्तरी — 69 प्रश्न

शास्त्रों और पुराणों पर आधारित प्रेत विषय के प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर — कुल 69 प्रश्न

लोक

भुवर्लोक के निचले हिस्से में तमोगुणी सत्ताएं क्यों रहती हैं?

निचले भुवर्लोक का धुंधलापन और अंधकार तमोगुणी सत्ताओं के अनुकूल है। साथ ही तमोगुण उन्हें उच्च लोकों तक जाने से रोकता है इसलिए वे यहीं रहती हैं।

भुवर्लोकतमोगुणनिचला हिस्सा
लोक

अकाल मृत्यु के बाद आत्मा भुवर्लोक में कैसे फंसती है?

अकाल मृत्यु में आत्मा की सामान्य यात्रा बाधित होती है। वह लिंग शरीर में प्रेत योनि को प्राप्त होकर भुवर्लोक के घने वायुमंडल में तीव्र वायु के बीच बिना आश्रय के फंस जाती है।

अकाल मृत्युभुवर्लोकप्रेत
लोक

वायवीय देह क्या है?

मृत्यु के बाद की सूक्ष्म वायु देह।

वायवीय देहगरुड़ पुराणप्रेत
लोक

सपिण्डीकरण क्या है?

सपिण्डीकरण वह संस्कार है जिसमें प्रेत का पिण्ड पितरों के पिण्डों से मिलाकर उसे पितृलोक में स्थान दिया जाता है।

सपिण्डीकरणश्राद्धप्रेत
लोक

प्रेत, पिशाच, भूत, यक्ष और राक्षस योनियों से क्या शिक्षा मिलती है?

ये योनियाँ सिखाती हैं कि कर्म, मृत्यु-काल की आसक्ति और संस्कारों की अवहेलना आत्मा की गति तय करते हैं; धर्म और श्राद्ध-मुक्ति के मार्ग हैं।

प्रेतपिशाचभूत
लोक

भूत और प्रेत में क्या अंतर है?

प्रेत संस्कार-अभाव से बनी मुक्ति चाहने वाली अवस्था है, जबकि भूत तीव्र आसक्ति या बदले की इच्छा से पृथ्वी पर रुकी आत्मा है।

भूत प्रेत अंतरप्रेतभूत
लोक

पिशाच प्रेत से अधिक तामसिक क्यों माना गया है?

पिशाच मांस-मल भक्षक, श्मशानवासी, हिंसक और मनुष्य को उन्माद में डालने वाला होता है, इसलिए प्रेत से अधिक तामसिक है।

पिशाचप्रेततामसिक
लोक

प्रेत कल्प तक भटकता क्यों है?

पिण्डदान और श्राद्ध के अभाव में आत्मा आगे की गति नहीं पाती, इसलिए प्रेत रूप में कल्प तक भटकती है।

प्रेतकल्प तक भटकनापिण्डदान
लोक

प्रेत कुछ खा-पी क्यों नहीं सकता?

प्रेत के पास मुख, गला और आमाशय वाला स्थूल शरीर नहीं होता, इसलिए वह भूख-प्यास होने पर भी खा-पी नहीं सकता।

प्रेतभूख प्यासवायव्य शरीर
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

तिल दान का क्या महत्व है?

तिल दान प्रेत के पाप नष्ट करता है और असुर-दानवों को दूर रखता है।

तिल दानपाप नाशविष्णु
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

शास्त्रों में प्रेत को मांस की आवश्यकता का क्या उल्लेख है?

शास्त्रों में प्रेत के लिए मांस का उल्लेख है, पर कलियुग में उसके स्थान पर केले या सात्त्विक द्रव्य दिए जाते हैं।

प्रेतमांसकलियुग
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

प्रेत को दीपदान क्यों दिया जाता है?

दीपदान ग्यारहवें और बारहवें दिन प्रेत की तृप्ति के लिए दिए जाने वाले अन्न-जल के साथ किया जाता है।

दीपदानप्रेतग्यारहवाँ दिन
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

ग्यारहवें और बारहवें दिन प्रेत क्या ग्रहण करता है?

ग्यारहवें और बारहवें दिन प्रेत अन्न, जल और दीपदान ग्रहण करता है।

ग्यारहवाँ दिनबारहवाँ दिनप्रेत
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

एकादशाह क्या होता है?

एकादशाह ग्यारहवें दिन का कृत्य है, जब पिण्डज शरीर पूर्ण होने के बाद प्रेत को अन्न, जल और दीपदान दिया जाता है।

एकादशाहग्यारहवाँ दिनप्रेत
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

दसवें दिन आत्मा में भूख-प्यास क्यों जागती है?

दसवें दिन पिण्डज शरीर पूर्ण होने पर आत्मा में तीव्र क्षुधा-पिपासा जागती है।

दसवाँ दिनभूख प्यासपिण्डज शरीर
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

प्रेत पिण्ड का भाग खाकर क्या पाता है?

प्रेत पिण्ड का भाग खाकर क्षुधा-शांति और शरीर-निर्माण सहने की ऊर्जा पाता है।

प्रेतपिण्डक्षुधा शांति
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

पिण्ड का चौथा भाग कौन खाता है?

पिण्ड का चौथा भाग स्वयं प्रेत खाता है।

पिण्ड का चौथा भागप्रेतक्षुधा शांति
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

पिण्ड का तीसरा भाग किसे मिलता है?

पिण्ड का तीसरा भाग यमराज के अनुचरों यानी यमदूतों को मिलता है।

पिण्ड का तीसरा भागयमदूतयमराज
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

पिण्डदान न होने पर आत्मा आकाश में क्यों भटकती है?

पिण्डदान न होने से पिण्डज शरीर नहीं बनता, इसलिए आत्मा भूखी-प्यासी वायव्य रूप में भटकती है।

पिण्डदानआकाश में भटकनावायव्य रूप
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

मृत्यु के बाद दस दिनों का पिण्डदान क्यों जरूरी है?

दस दिनों का पिण्डदान प्रेत का पिण्डज शरीर बनाता है और आत्मा को भटकने से बचाता है।

दस दिन पिण्डदानदशगात्रपिण्डज शरीर
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

अंतिम पिण्ड हाथ में रखने के बाद आत्मा को क्या कहा जाता है?

अंतिम पिण्ड हाथ में रखने के बाद आत्मा को प्रेत कहा जाता है।

अंतिम पिण्डप्रेतप्रेतत्व
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

अशौच या सूतक क्या होता है?

मृत्यु से सपिण्डीकरण तक घर और परिजनों में रहने वाली अशुद्धि को अशौच या सूतक कहा जाता है।

अशौचसूतकमृत्यु
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

रोने से गिरे आँसू और कफ का प्रेत पर क्या प्रभाव होता है?

गिरे हुए आँसू और कफ प्रेत को विवश होकर खाने पड़ते हैं, जिससे उसे कष्ट होता है।

आँसूकफप्रेत
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

गरुड़ पुराण में विलाप करने से प्रेत को क्या कष्ट बताया गया है?

विलाप से गिरे कफ और आँसू प्रेत को खाने पड़ते हैं, जो उसके लिए कष्टदायक है।

गरुड़ पुराणविलापप्रेत

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सनातन धर्म प्रश्नोत्तरी — शास्त्रीय ज्ञान

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