विस्तृत उत्तर
भुवर्लोक के निचले हिस्से में तमोगुणी सत्ताओं के रहने के कारण शास्त्रों में स्पष्ट किए गए हैं। पहला कारण यह है कि भुवर्लोक का निचला हिस्सा जहाँ सघन बादल और वायु के भयंकर भंवर होते हैं वहाँ एक प्रकार का धुंधलापन या छायामयी स्थिति बनी रहती है। चूंकि यह पूर्णतः प्रकाशमान नहीं है इसलिए तमोगुणी सत्ताएं जो अंधकार में अधिक बलवान होती हैं यहाँ निवास करती हैं। दूसरा कारण यह है कि इन सत्ताओं का तमोगुण उन्हें उच्च लोकों तक जाने से रोकता है। वायुमंडलीय राक्षस रात के समय अंधकार में अधिक बलवान हो जाते हैं। प्रेत और पिशाच अपने कर्म-बंधनों के कारण यहाँ अटके हैं। गीता के चौदहवें अध्याय के अनुसार तमोगुण आत्मा को नीचे की ओर खींचता है।
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