विस्तृत उत्तर
सपिण्डीकरण वह विशिष्ट संस्कार है जिसके द्वारा मृत जीव प्रेत अवस्था से मुक्त होकर पितृलोक में आधिकारिक स्थान प्राप्त करता है। मृत्यु से लेकर सपिण्डीकरण तक जीव प्रेत अवस्था में माना जाता है। सपिण्डीकरण सामान्यतः मृत्यु के १२वें दिन या एक वर्ष पूर्ण होने पर किया जाता है। इस संस्कार में चार कलश और चार पिण्ड बनाए जाते हैं—तीन पितरों के लिए और एक प्रेत के लिए। वैदिक मन्त्रों के उच्चारण के साथ प्रेत के पिण्ड को पितामह और प्रपितामह के पिण्डों के साथ मिला दिया जाता है। इसी कर्म के बाद प्रेत पितृ मण्डल में प्रवेश कर वसु स्वरूप पितृ बनता है।
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