विस्तृत उत्तर
पिशाच योनि प्रेत योनि से भी अधिक मलिन, तामसिक, हिंसक और नकारात्मक मानी जाती है। प्रेत मुख्यतः अतृप्ति, भूख-प्यास और संस्कार-अभाव से पीड़ित अवस्था है, जबकि पिशाच अंधकार में विचरण करने वाले, श्मशानों में रहने वाले, मांस और मल-मूत्र का भक्षण करने वाले आसुरी जीव हैं। वे मनुष्यों के भीतर प्रवेश करने और उनके विचारों को दूषित करने में सक्षम होते हैं, जिससे उन्माद, मतिभ्रम और भयंकर मानसिक तथा शारीरिक रोग उत्पन्न होते हैं। इसी ध्वंसात्मक और मलिन स्वभाव के कारण पिशाच प्रेत से अधिक तामसिक माना गया है।
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