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पिशाच प्रश्नोत्तरी — 12 प्रश्न

शास्त्रों और पुराणों पर आधारित पिशाच विषय के प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर — कुल 12 प्रश्न

पाशुपत योग

पशु किसे कहा गया है?

देवता से लेकर पिशाच तक सभी प्राणी पशु कहे गए हैं।

पशुदेवतापिशाच
लोक

विश्वेदेव श्राद्ध को राक्षसों और पिशाचों से कैसे बचाते हैं?

विश्वेदेव श्राद्ध के रक्षक हैं; वे सुनिश्चित करते हैं कि पितृभाग राक्षस या पिशाच न ले जाएँ।

विश्वेदेवश्राद्ध रक्षाराक्षस
लोक

प्रेत, पिशाच, भूत, यक्ष और राक्षस योनियों से क्या शिक्षा मिलती है?

ये योनियाँ सिखाती हैं कि कर्म, मृत्यु-काल की आसक्ति और संस्कारों की अवहेलना आत्मा की गति तय करते हैं; धर्म और श्राद्ध-मुक्ति के मार्ग हैं।

प्रेतपिशाचभूत
लोक

अग्नि पुराण में देवयोनियों का क्रम क्या है?

अग्नि पुराण का क्रम है: पिशाच, राक्षस, यक्ष, गन्धर्व, इन्द्र, सोम, प्रजापति और ब्रह्मा।

अग्नि पुराणदेवयोनियाँपिशाच
लोक

पिशाच, राक्षस और यक्ष का पदानुक्रम क्या है?

अग्नि पुराण के अनुसार क्रम है: पिशाच, राक्षस, यक्ष; पिशाच सबसे तामसिक, राक्षस शक्तिशाली और यक्ष अधिक राजसिक-सात्त्विक हैं।

पिशाचराक्षसयक्ष
लोक

पिशाच रूप बदलने में कैसे सक्षम होते हैं?

पिशाच मायावी होते हैं; वे इच्छानुसार रूप बदल सकते हैं और अदृश्य हो सकते हैं।

पिशाचरूप परिवर्तनमायावी शक्ति
लोक

पैशाची भाषा क्या है?

पैशाची पिशाचों की भाषा है; गुणाढ्य की बृहत्कथा मूलतः इसी भाषा में लिखी गई थी।

पैशाची भाषापिशाचबृहत्कथा
लोक

अथर्ववेद में पिशाचों के बारे में क्या प्रार्थना की गई है?

अथर्ववेद में पृथ्वी माता से पिशाचों, राक्षसों और अन्य अमानवीय शक्तियों को मनुष्यों से दूर रखने की प्रार्थना की गई है।

अथर्ववेदपिशाचराक्षस
लोक

पिशाच प्रेत से अधिक तामसिक क्यों माना गया है?

पिशाच मांस-मल भक्षक, श्मशानवासी, हिंसक और मनुष्य को उन्माद में डालने वाला होता है, इसलिए प्रेत से अधिक तामसिक है।

पिशाचप्रेततामसिक
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

कपास दान किससे रक्षा करता है?

कपास दान भूतों और पिशाचों के खतरे से रक्षा करता है।

कपास दानभूतपिशाच
फलश्रुति और लाभ

नीलकंठ स्तोत्र से भूत-प्रेत का डर दूर होता है क्या?

हाँ, नीलकंठ स्तोत्र के पाठ से भूत, प्रेत, पिशाच, डाकिनी और शाकिनी सभी भाग जाते हैं — स्तोत्र में 'हन हन, दहन' से इन्हें नष्ट करने का आदेश है।

भूत प्रेतपिशाचनकारात्मकता
पौराणिक कथाएँ

घंटाकर्ण कौन थे और उन्होंने कानों में घंटे क्यों बाँधे थे?

घंटाकर्ण शिव का परम भक्त पिशाच था जो विष्णु से घृणा करता था। विष्णु का नाम न सुनने के लिए कानों में घंटे लटकाए — नाम सुनते ही सिर हिलाता, घंटों की ध्वनि नाम को दबा देती। इसी से नाम 'घंटाकर्ण' पड़ा।

घंटाकर्णशिवगणपिशाच

विषय-वार प्रश्नोत्तर

🙏पूजा विधि📿मंत्र जाप विधि🔱शिव पूजा🔮तंत्र साधना🏠वास्तु शास्त्र💭सपनों का मतलब🪐ज्योतिष उपाय🙏व्रत उपवास🔥देवी पूजा🧘ध्यान साधना🛕तीर्थ यात्रा🔥हवन यज्ञ📜स्तोत्र पाठ🐘गणेश पूजा🙏विष्णु भक्ति📖सनातन दर्शन🕯️श्राद्ध पितृ कर्म🎗️संस्कार विधि❤️भक्ति साधनाधार्मिक उपाय

सनातन धर्म प्रश्नोत्तरी — शास्त्रीय ज्ञान

पौराणिक प्रश्नोत्तरी पर आपको हिंदू धर्म, वेद, पुराण, भगवद गीता, रामायण, महाभारत, पूजा विधि, व्रत-त्योहार, मंत्र, देवी-देवताओं और सनातन संस्कृति से जुड़े सैकड़ों प्रश्नों के प्रामाणिक उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर शास्त्रों और प्राचीन ग्रंथों पर आधारित है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत, प्रमाणित उत्तर पढ़ें।