विस्तृत उत्तर
अग्नि पुराण में आठ प्रकार की देवयोनियों का आरोही क्रम दिया गया है, जिसमें चेतना के स्तर को नीचे से ऊपर की ओर दिखाया गया है। इस क्रम में प्रथम पिशाच हैं, जो सर्वाधिक तामसिक, मलिन और हिंसक हैं। द्वितीय राक्षस हैं, जो तामसिक-राजसिक, शक्तिशाली और अहंकारी हैं। तृतीय यक्ष हैं, जो राजसिक हैं, धन-रक्षक हैं और उनमें कुछ सीमा तक सात्त्विकता भी है। इस शास्त्रीय क्रम से स्पष्ट होता है कि पिशाच सबसे निचले और मलिन स्तर पर हैं, राक्षस उनसे अधिक शक्ति और बुद्धि रखते हैं, और यक्ष राक्षसों से अधिक सात्त्विक और श्रेष्ठ माने गए हैं।
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