अस्त्र शस्त्रअग्नि पुराण में धनुर्वेद के कितने भाग बताए गए हैं?अग्नि पुराण में धनुर्वेद के 4 भाग हैं — (1) अमुक्त (हाथ में पकड़े), (2) मुक्त (फेंके जाने वाले), (3) मुक्तामुक्त (दोनों प्रकार), (4) यंत्रमुक्त (यंत्र से फेंके)।#अग्नि पुराण#धनुर्वेद#चार भाग
लोकतृतीया श्राद्ध शत्रु विजय कैसे देता है?अग्नि पुराण के अनुसार तृतीया श्राद्ध शत्रु विजय देता है।#शत्रु विजय#तृतीया श्राद्ध#अग्नि पुराण
लोकअग्नि पुराण में तृतीया श्राद्ध का फल क्या है?अग्नि पुराण में तृतीया श्राद्ध का फल शत्रु विजय बताया गया है।#अग्नि पुराण#तृतीया श्राद्ध फल#शत्रु विजय
लोकतृतीया श्राद्ध से शत्रु नाश होता है?अग्नि पुराण तृतीया श्राद्ध को शत्रु विजय से जोड़ता है।#शत्रु नाश#अग्नि पुराण#तृतीया श्राद्ध
लोकअग्नि पुराण में देवयोनियों का क्रम क्या है?अग्नि पुराण का क्रम है: पिशाच, राक्षस, यक्ष, गन्धर्व, इन्द्र, सोम, प्रजापति और ब्रह्मा।#अग्नि पुराण#देवयोनियाँ#पिशाच
लोकपिशाच, राक्षस और यक्ष का पदानुक्रम क्या है?अग्नि पुराण के अनुसार क्रम है: पिशाच, राक्षस, यक्ष; पिशाच सबसे तामसिक, राक्षस शक्तिशाली और यक्ष अधिक राजसिक-सात्त्विक हैं।#पिशाच#राक्षस#यक्ष
लोकहिंसक मृत्यु के बाद भूत योनि क्यों मिलती है?हिंसक और अचानक मृत्यु में आत्मा मृत्यु को स्वीकार नहीं कर पाती, इसलिए सूक्ष्म शरीर पृथ्वी पर अटककर भूत बन सकता है।#हिंसक मृत्यु#भूत योनि#अचानक मृत्यु
लोकछल-कपट से धन कमाने वाला पिशाच क्यों बनता है?छल-कपट से जीविका चलाने और दूसरों का धन हरने वाला पिशाच योनि पाता है, विशेषकर असहायों की संपत्ति छीनने पर।#छल कपट#पिशाच योनि#धन हरण
पाशुपत अस्त्र साधनाअग्नि पुराण के अनुसार पाशुपतास्त्र स्तोत्र की पाठ विधि क्या है?विघ्न निवारण के लिए इस स्तोत्र का 21 दिनों तक सुबह-शाम 21 बार पाठ करने का विधान है।#अग्नि पुराण#स्तोत्र#विधि
पाशुपत अस्त्र साधनापाशुपतास्त्र साधना का मुख्य शास्त्रीय आधार क्या है?यह साधना महाभारत, अग्नि पुराण, शिव पुराण और रुद्रयामल तंत्र जैसे प्राचीन ग्रंथों पर आधारित है।#शिव पुराण#महाभारत#अग्नि पुराण
पूजन विधानअनंत चतुर्दशी की पूजा में मालपुआ और खीर का भोग क्यों लगता है?अग्नि पुराण के नियम के अनुसार इस दिन लगभग 1 किलो आटे का मालपुआ बनाना चाहिए, जिसका आधा हिस्सा ब्राह्मण को दान देना और आधा खुद प्रसाद के रूप में खाना शुभ माना गया है।#मालपुआ#खीर#अग्नि पुराण
पुराण ज्ञानअग्नि पुराण कब और किसे पढ़ना चाहिए?अग्नि पुराण भारतीय विश्वकोश है — इसमें विष्णु-अवतार, पूजा-विधि, वास्तु, ज्योतिष, आयुर्वेद, धनुर्वेद, रामायण-महाभारत सार सब एक साथ है। जो व्यापक ज्ञान चाहे वह इसे पढ़े। शुद्ध मन से कभी भी पढ़ा जा सकता है।#अग्नि पुराण#भारतीय विश्वकोश#कर्मकाण्ड