📖
विस्तृत उत्तर
अग्नि पुराण के अनुसार, जो मनुष्य छल-कपट से अपनी जीविका चलाते हैं और दूसरों का धन हरते हैं, वे मृत्यु के पश्चात पिशाच बनते हैं। विशेष रूप से जो स्त्रियों, बालकों, वृद्धों और असहाय रोगियों के प्रति निर्दयतापूर्वक व्यवहार करते हुए उनकी संपत्ति छीनते हैं, वे पिशाच योनि के अधिकारी होते हैं। छल-कपट और पर-धन हरण जीव को अत्यंत कुटिल, तामसिक और निर्दयी बनाता है, जिसका फल पिशाच जैसी मलिन और हिंसक योनि के रूप में बताया गया है।
🔗
आगे क्या पढ़ें
प्रश्न से जुड़े हब और आज के उपयोगी पंचांग लिंक
इसे अपने प्रियजनों के साथ साझा करें
क्या यह उत्तर सहायक था?




