विस्तृत उत्तर
इस दिन भगवान को विशेष रूप से क्षीर (खीर) और मालपुए का सात्विक भोग लगाया जाता है। अग्नि पुराण के स्पष्ट निर्देश के अनुसार, इस दिन एक 'प्रस्थ' (लगभग 1 किलो) आटे से मालपुआ (या पूड़ी) बनाकर उसका आधा भाग ब्राह्मण को दान करना चाहिए और आधा भाग स्वयं प्रसाद के रूप में ग्रहण करना चाहिए।




