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पूजन विधान प्रश्नोत्तर — 6 प्रश्न

पूजन विधान से जुड़े 6 प्रामाणिक प्रश्नोत्तर पढ़ें। शास्त्रों और पुराणों पर आधारित उत्तर एक ही जगह मिलेंगे।

कुल 6 प्रश्न

रथ सप्तमी के दिन कौन से मंत्र या पाठ करने चाहिए?

इस दिन सूरज निकलते समय विजय दिलाने वाले 'आदित्य-हृदय स्तोत्र' का पाठ करना चाहिए। साथ ही 'ॐ घृणि सूर्याय नमः' या 'सूर्य गायत्री मंत्र' का 108 बार जाप करना अत्यंत शुभ होता है।

आदित्य-हृदयसूर्य गायत्रीबीज मंत्र
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रथ सप्तमी के स्नान में किन पत्तों का इस्तेमाल होता है और कैसे?

इस दिन नहाते समय 'आक' या 'मदार' (अर्क) के 7 पत्तों का इस्तेमाल होता है। नहाते समय इन 7 पत्तों को सिर, कंधों, घुटनों और पैरों पर रखकर पाप-नाशक मंत्र के साथ पानी डाला जाता है।

अर्क-पत्रस्नान विधिआक के पत्ते
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अनंत सूत्र बांधते समय कौन सा मंत्र बोलना चाहिए?

धागा बांधते समय मंत्र बोलना चाहिए— 'अनन्तसंसारमहासमुद्रे मग्नान् समभ्युद्धर वासुदेव...'। इसका मतलब है: हे वासुदेव, इस संसार रूपी बड़े समुद्र से मुझे बचाइए।

मंत्रवासुदेवप्रार्थना
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अनंत चतुर्दशी की पूजा में मालपुआ और खीर का भोग क्यों लगता है?

अग्नि पुराण के नियम के अनुसार इस दिन लगभग 1 किलो आटे का मालपुआ बनाना चाहिए, जिसका आधा हिस्सा ब्राह्मण को दान देना और आधा खुद प्रसाद के रूप में खाना शुभ माना गया है।

मालपुआखीरअग्नि पुराण
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अनंत चतुर्दशी के दिन शेषनाग की पूजा क्यों की जाती है?

क्योंकि शेषनाग भगवान विष्णु की शय्या (बिस्तर) हैं और उन्हीं के ऊपर भगवान आराम करते हुए दुनिया चलाते हैं। घास (दूर्वा) से शेषनाग बनाकर कलश पर उनकी पूजा होती है।

शेषनागकाल शक्तिकलश
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अनंत चतुर्दशी व्रत में मुख्य रूप से किसकी पूजा होती है?

इस व्रत में मुख्य रूप से भगवान विष्णु के 'अनन्त' स्वरूप और उनकी शय्या बने काल के प्रतीक 'शेषनाग' की पूजा की जाती है।

अनन्त नारायणशेषनागविष्णु पूजा
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पूजन विधान — शास्त्रीय प्रश्नोत्तर संग्रह

पौराणिक पर पूजन विधान श्रेणी में आपको सनातन धर्म, वेद, पुराण और शास्त्रों पर आधारित प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर विद्वानों द्वारा शास्त्रीय प्रमाणों सहित तैयार किया गया है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत उत्तर पढ़ें। अन्य विषयों के लिए प्रश्नोत्तरी मुख्य पृष्ठ देखें।

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पूजन विधान को गहराई से समझने का तरीका

पूजन विधान प्रश्नोत्तर पेज छोटे उत्तरों को एक साथ रखता है, इसलिए इसे त्वरित समाधान और आगे पढ़ने के प्रवेश-द्वार दोनों की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है।

6 प्रश्न वाले इस पेज पर सबसे अच्छा तरीका यह है कि पहले वही प्रविष्टियाँ पढ़ें जो आपके वर्तमान सवाल से सीधा संबंध रखती हैं, फिर उनसे जुड़े अगले लेख या प्रश्न खोलें ताकि आधी-अधूरी जानकारी के बजाय पूरा संदर्भ बने।

अगर आपको किसी उत्तर का छोटा रूप मिल रहा है, तो उसी विषय के अगले प्रश्न और संबंधित विस्तृत लेख भी देखें। इससे नियम, अपवाद, समय, विधि और शास्त्रीय आधार जैसी बातें स्पष्ट होती हैं।

शुरुआत उन प्रश्न से करें जिनका शीर्षक आपके सवाल या उद्देश्य से सबसे अधिक मेल खाता है।

पढ़ते समय विधि, महत्व, समय और सावधानियों जैसे अलग-अलग पहलुओं को नोट करें, क्योंकि ये अक्सर अलग प्रविष्टियों में बँटे होते हैं।

अगर एक पेज से पूरा उत्तर न मिले, तो उसी संग्रह के अगले लेख या प्रश्न खोलकर संदर्भ पूरा करें।