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नवग्रहों का देव स्वरूप प्रश्नोत्तर — 6 प्रश्न

नवग्रहों का देव स्वरूप से जुड़े 6 प्रामाणिक प्रश्नोत्तर पढ़ें। शास्त्रों और पुराणों पर आधारित उत्तर एक ही जगह मिलेंगे।

कुल 6 प्रश्न

राहु-केतु की कथा का क्या संदेश है?

राहु-केतु की कथा का संदेश: ब्रह्मांडीय व्यवस्था में अधर्म से जन्मी शक्तियों को भी धर्म की स्थापना के लिए नियोजित कर लिया जाता है।

राहु केतु संदेशअधर्म शक्तिधर्म स्थापना
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राहु और केतु अमर कैसे हो गए?

स्वरभानु असुर ने अमृत पान किया था — विष्णु के सुदर्शन चक्र से सिर-धड़ अलग होने पर भी अमृत के प्रभाव से सिर (राहु) और धड़ (केतु) दोनों अमर हो गए।

राहु केतु अमरअमृत प्रभावसुदर्शन चक्र
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राहु और केतु की उत्पत्ति कैसे हुई?

समुद्र मंथन में स्वरभानु असुर ने देव वेष में अमृत पान किया — सूर्य-चंद्र ने रहस्य उजागर किया, विष्णु के सुदर्शन चक्र से सिर (राहु) और धड़ (केतु) अलग हुए और अमृत के कारण दोनों अमर हो नवग्रह बने।

राहु केतु उत्पत्तिस्वरभानुसमुद्र मंथन
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मंगल देव को 'भूमिपुत्र' क्यों कहते हैं?

मंगल देव पृथ्वी देवी के पुत्र हैं इसीलिए 'भूमिपुत्र' कहलाते हैं — इनका ध्यान मंत्र 'धरणी गर्भ संभूतं' से आरंभ होता है।

मंगल देवभूमिपुत्रपृथ्वी देवी
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चंद्र देव की उत्पत्ति कैसे हुई?

पुरुष सूक्त: चंद्र विराट पुरुष के मन से उत्पन्न (चन्द्रमा मनसो जातः)। समुद्र मंथन से भी प्राकट्य हुआ — क्षीरसागर पुत्र कहलाए। भगवान शिव ने मस्तक पर धारण कर मान बढ़ाया।

चंद्र देव उत्पत्तिविराट पुरुष मनसमुद्र मंथन
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सूर्य देव कौन हैं?

सूर्य देव महर्षि कश्यप और अदिति के पुत्र हैं — वे समस्त ग्रहों के अधिपति, जगत की आत्मा और प्राण-ऊर्जा के स्रोत हैं।

सूर्य देवमहर्षि कश्यपअदिति पुत्र
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नवग्रहों का देव स्वरूप — शास्त्रीय प्रश्नोत्तर संग्रह

पौराणिक पर नवग्रहों का देव स्वरूप श्रेणी में आपको सनातन धर्म, वेद, पुराण और शास्त्रों पर आधारित प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर विद्वानों द्वारा शास्त्रीय प्रमाणों सहित तैयार किया गया है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत उत्तर पढ़ें। अन्य विषयों के लिए प्रश्नोत्तरी मुख्य पृष्ठ देखें।

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नवग्रहों का देव स्वरूप को गहराई से समझने का तरीका

नवग्रहों का देव स्वरूप प्रश्नोत्तर पेज छोटे उत्तरों को एक साथ रखता है, इसलिए इसे त्वरित समाधान और आगे पढ़ने के प्रवेश-द्वार दोनों की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है।

6 प्रश्न वाले इस पेज पर सबसे अच्छा तरीका यह है कि पहले वही प्रविष्टियाँ पढ़ें जो आपके वर्तमान सवाल से सीधा संबंध रखती हैं, फिर उनसे जुड़े अगले लेख या प्रश्न खोलें ताकि आधी-अधूरी जानकारी के बजाय पूरा संदर्भ बने।

अगर आपको किसी उत्तर का छोटा रूप मिल रहा है, तो उसी विषय के अगले प्रश्न और संबंधित विस्तृत लेख भी देखें। इससे नियम, अपवाद, समय, विधि और शास्त्रीय आधार जैसी बातें स्पष्ट होती हैं।

शुरुआत उन प्रश्न से करें जिनका शीर्षक आपके सवाल या उद्देश्य से सबसे अधिक मेल खाता है।

पढ़ते समय विधि, महत्व, समय और सावधानियों जैसे अलग-अलग पहलुओं को नोट करें, क्योंकि ये अक्सर अलग प्रविष्टियों में बँटे होते हैं।

अगर एक पेज से पूरा उत्तर न मिले, तो उसी संग्रह के अगले लेख या प्रश्न खोलकर संदर्भ पूरा करें।