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तांत्रिक विश्व दृष्टि और तीन भाव प्रश्नोत्तर — 6 प्रश्न

तांत्रिक विश्व दृष्टि और तीन भाव से जुड़े 6 प्रामाणिक प्रश्नोत्तर पढ़ें। शास्त्रों और पुराणों पर आधारित उत्तर एक ही जगह मिलेंगे।

कुल 6 प्रश्न

शव साधना किस भाव के साधक की साधना है?

शव साधना वीर-भाव के साधक की सर्वोच्च परीक्षा है — यह उस साधक के लिए है जो शुद्ध-अशुद्ध के भेद से ऊपर उठकर शव में भी शिव का दर्शन करने की क्षमता रखता है।

वीर भाव साधनासर्वोच्च परीक्षाअद्वैत दर्शन
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दिव्य भाव क्या होता है?

दिव्य-भाव वह अवस्था है जब साधक समस्त संघर्षों से पार होकर सहज ही दिव्यता, प्रेम और करुणा में स्थित हो जाता है।

दिव्य भावसंघर्ष से पारदिव्यता प्रेम करुणा
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वीर भाव क्या होता है?

वीर-भाव में साधक भीतर के अंधकार, भय और घृणा का सीधे सामना करता है — वर्जित परिस्थितियों में भी समभाव रखकर द्वैत जीतने की कठोर साधना करता है। शव साधना इसी की सर्वोच्च परीक्षा है।

वीर भावअंधकार सामनासमभाव
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पशु भाव क्या होता है?

पशु-भाव वह अवस्था है जिसमें व्यक्ति सामाजिक नियमों, भय, लज्जा और घृणा के बंधनों (पाश) में जकड़ा रहता है — वह शुद्ध-अशुद्ध के भेद को मानता है और साधना इन्हीं सीमाओं में रहती है।

पशु भावसामाजिक बंधनपाश
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तंत्र शास्त्र साधकों को कितने भावों में वर्गीकृत करता है?

तंत्र शास्त्र साधकों को तीन भावों में वर्गीकृत करता है: (1) पशु-भाव — बंधनों में जकड़ा, (2) वीर-भाव — भय का सीधा सामना करने वाला, (3) दिव्य-भाव — दिव्यता-प्रेम-करुणा में स्थित।

तीन भावपशु वीर दिव्यतंत्र वर्गीकरण
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तंत्र शास्त्र में पवित्र और अपवित्र का भेद क्यों नहीं है?

तंत्र के अनुसार सम्पूर्ण ब्रह्मांड शिव-शक्ति का रूप है — सब कुछ दिव्य चेतना से बना है इसलिए कुछ भी अपवित्र नहीं। पवित्र-अपवित्र का भेद अज्ञान (अविद्या) की उपज है।

पवित्र अपवित्रअविद्यादिव्य चेतना
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तांत्रिक विश्व दृष्टि और तीन भाव — शास्त्रीय प्रश्नोत्तर संग्रह

पौराणिक पर तांत्रिक विश्व दृष्टि और तीन भाव श्रेणी में आपको सनातन धर्म, वेद, पुराण और शास्त्रों पर आधारित प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर विद्वानों द्वारा शास्त्रीय प्रमाणों सहित तैयार किया गया है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत उत्तर पढ़ें। अन्य विषयों के लिए प्रश्नोत्तरी मुख्य पृष्ठ देखें।

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तांत्रिक विश्व दृष्टि और तीन भाव को गहराई से समझने का तरीका

तांत्रिक विश्व दृष्टि और तीन भाव प्रश्नोत्तर पेज छोटे उत्तरों को एक साथ रखता है, इसलिए इसे त्वरित समाधान और आगे पढ़ने के प्रवेश-द्वार दोनों की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है।

6 प्रश्न वाले इस पेज पर सबसे अच्छा तरीका यह है कि पहले वही प्रविष्टियाँ पढ़ें जो आपके वर्तमान सवाल से सीधा संबंध रखती हैं, फिर उनसे जुड़े अगले लेख या प्रश्न खोलें ताकि आधी-अधूरी जानकारी के बजाय पूरा संदर्भ बने।

अगर आपको किसी उत्तर का छोटा रूप मिल रहा है, तो उसी विषय के अगले प्रश्न और संबंधित विस्तृत लेख भी देखें। इससे नियम, अपवाद, समय, विधि और शास्त्रीय आधार जैसी बातें स्पष्ट होती हैं।

शुरुआत उन प्रश्न से करें जिनका शीर्षक आपके सवाल या उद्देश्य से सबसे अधिक मेल खाता है।

पढ़ते समय विधि, महत्व, समय और सावधानियों जैसे अलग-अलग पहलुओं को नोट करें, क्योंकि ये अक्सर अलग प्रविष्टियों में बँटे होते हैं।

अगर एक पेज से पूरा उत्तर न मिले, तो उसी संग्रह के अगले लेख या प्रश्न खोलकर संदर्भ पूरा करें।