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विश्वेदेव प्रश्नोत्तर — 2 प्रश्न

विश्वेदेव से जुड़े 2 प्रामाणिक प्रश्नोत्तर पढ़ें। शास्त्रों और पुराणों पर आधारित उत्तर एक ही जगह मिलेंगे।

कुल 2 प्रश्न

क्रतु-दक्ष विश्वेदेव क्या हैं?

क्रतु और दक्ष विश्वेदेवों की एक जोड़ी हैं, जो पार्वण श्राद्ध में पुरूरवा-आर्द्रव के विकल्प के रूप में आहूत होते हैं। क्रतु एक प्राचीन ऋषि थे, और दक्ष एक महान प्रजापति। दोनों यज्ञ-कर्म के विशेष ज्ञाता थे। इनकी उपस्थिति श्राद्ध को यज्ञ-स्वरूप बनाती है। शास्त्रों में अथवा शब्द से दोनों जोड़ियों को विकल्प के रूप में रखा गया है, और स्थानीय परम्परा के अनुसार किसी एक की स्थापना की जा सकती है।

क्रतुदक्षविश्वेदेव जोड़ी
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पुरूरवा-आर्द्रव कौन हैं?

पुरूरवा और आर्द्रव विश्वेदेवों की एक जोड़ी हैं, जो पार्वण श्राद्ध में आहूत होते हैं। पुरूरवा एक चन्द्रवंशी सम्राट थे, जो अत्यंत धर्मपरायण और विष्णु भक्त थे। उन्होंने पितरों की आकांक्षा को पूर्ण कर विधिपूर्वक श्राद्ध संपन्न किया, और अकूत ऐश्वर्य, धर्म तथा मोक्ष प्राप्त किया। आर्द्रव उनके सहचर देवता हैं। दोनों मिलकर श्राद्ध में हवि को पितरों तक पहुँचाने में सहायक होते हैं।

पुरूरवाआर्द्रवविश्वेदेव जोड़ी
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विश्वेदेव — शास्त्रीय प्रश्नोत्तर संग्रह

पौराणिक पर विश्वेदेव श्रेणी में आपको सनातन धर्म, वेद, पुराण और शास्त्रों पर आधारित प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर विद्वानों द्वारा शास्त्रीय प्रमाणों सहित तैयार किया गया है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत उत्तर पढ़ें। अन्य विषयों के लिए प्रश्नोत्तरी मुख्य पृष्ठ देखें।

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विश्वेदेव को गहराई से समझने का तरीका

विश्वेदेव प्रश्नोत्तर पेज छोटे उत्तरों को एक साथ रखता है, इसलिए इसे त्वरित समाधान और आगे पढ़ने के प्रवेश-द्वार दोनों की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है।

2 प्रश्न वाले इस पेज पर सबसे अच्छा तरीका यह है कि पहले वही प्रविष्टियाँ पढ़ें जो आपके वर्तमान सवाल से सीधा संबंध रखती हैं, फिर उनसे जुड़े अगले लेख या प्रश्न खोलें ताकि आधी-अधूरी जानकारी के बजाय पूरा संदर्भ बने।

अगर आपको किसी उत्तर का छोटा रूप मिल रहा है, तो उसी विषय के अगले प्रश्न और संबंधित विस्तृत लेख भी देखें। इससे नियम, अपवाद, समय, विधि और शास्त्रीय आधार जैसी बातें स्पष्ट होती हैं।

शुरुआत उन प्रश्न से करें जिनका शीर्षक आपके सवाल या उद्देश्य से सबसे अधिक मेल खाता है।

पढ़ते समय विधि, महत्व, समय और सावधानियों जैसे अलग-अलग पहलुओं को नोट करें, क्योंकि ये अक्सर अलग प्रविष्टियों में बँटे होते हैं।

अगर एक पेज से पूरा उत्तर न मिले, तो उसी संग्रह के अगले लेख या प्रश्न खोलकर संदर्भ पूरा करें।