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पारद शिवलिंग परिचय और माहात्म्य प्रश्नोत्तर — 7 प्रश्न

पारद शिवलिंग परिचय और माहात्म्य से जुड़े 7 प्रामाणिक प्रश्नोत्तर पढ़ें। शास्त्रों और पुराणों पर आधारित उत्तर एक ही जगह मिलेंगे।

कुल 7 प्रश्न

पारद शिवलिंग के दर्शन मात्र से क्या होता है?

स्कंद पुराण के अनुसार, हजार करोड़ शिवलिंगों के पूजन से जो फल मिलता है, वही अतुलनीय फल पारद शिवलिंग के दर्शन मात्र से मिल जाता है।

दर्शन मात्र फलस्कंद पुराणहजार करोड़ शिवलिंग
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शिवलिंगों में पारद शिवलिंग का क्या स्थान है?

शिवनिर्णय रत्नाकर के अनुसार: पत्थर से करोड़ गुना स्वर्ण, स्वर्ण से करोड़ गुना मणि, मणि से करोड़ गुना बाणलिंग, और बाणलिंग से भी करोड़ गुना पारद शिवलिंग — यह सर्वश्रेष्ठ है।

शिवलिंग पदानुक्रमपारद श्रेष्ठतास्वर्ण मणि बाणलिंग
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'रसात्परतरं लिङ्गं न भूतो न भविष्यति' का क्या अर्थ है?

'रसात्परतरं लिङ्गं न भूतो न भविष्यति' का अर्थ है: पारद से श्रेष्ठ शिवलिंग न भूतकाल में हुआ है और न भविष्य में होगा — यह शिवनिर्णय रत्नाकर का वचन है।

रसात्परतरंशिवनिर्णय रत्नाकरपारद श्रेष्ठता
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पारद शिवलिंग की महिमा क्या है?

पारद शिवलिंग के दर्शन मात्र से हजार करोड़ शिवलिंग पूजन का फल मिलता है। रसार्णव तंत्र कहता है कि इससे धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष — चारों पुरुषार्थ सिद्ध होते हैं।

पारद शिवलिंग महिमाफलश्रुतिचार पुरुषार्थ
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पारद को 'रसराज' क्यों कहते हैं?

पारद को 'रसराज' (सभी धातुओं का राजा) इसलिए कहते हैं क्योंकि इसे साक्षात् शिव का स्वरूप और भगवान शिव का 'वीर्य' (जीव-तत्व) माना गया है।

रसराजधातुओं का राजापारद
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पारद शिवलिंग क्या है?

पारद (पारा) को साक्षात् शिव का स्वरूप, 'रसराज' और भगवान शिव का 'वीर्य' (जीव-तत्व) माना गया है — इससे निर्मित शिवलिंग 'रसलिंग' कहलाता है जो सभी शिवलिंगों से श्रेष्ठ है।

पारद शिवलिंगरसलिंगशिव स्वरूप
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पारद शिवलिंग परिचय और माहात्म्य — शास्त्रीय प्रश्नोत्तर संग्रह

पौराणिक पर पारद शिवलिंग परिचय और माहात्म्य श्रेणी में आपको सनातन धर्म, वेद, पुराण और शास्त्रों पर आधारित प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर विद्वानों द्वारा शास्त्रीय प्रमाणों सहित तैयार किया गया है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत उत्तर पढ़ें। अन्य विषयों के लिए प्रश्नोत्तरी मुख्य पृष्ठ देखें।

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पारद शिवलिंग परिचय और माहात्म्य को गहराई से समझने का तरीका

पारद शिवलिंग परिचय और माहात्म्य प्रश्नोत्तर पेज छोटे उत्तरों को एक साथ रखता है, इसलिए इसे त्वरित समाधान और आगे पढ़ने के प्रवेश-द्वार दोनों की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है।

7 प्रश्न वाले इस पेज पर सबसे अच्छा तरीका यह है कि पहले वही प्रविष्टियाँ पढ़ें जो आपके वर्तमान सवाल से सीधा संबंध रखती हैं, फिर उनसे जुड़े अगले लेख या प्रश्न खोलें ताकि आधी-अधूरी जानकारी के बजाय पूरा संदर्भ बने।

अगर आपको किसी उत्तर का छोटा रूप मिल रहा है, तो उसी विषय के अगले प्रश्न और संबंधित विस्तृत लेख भी देखें। इससे नियम, अपवाद, समय, विधि और शास्त्रीय आधार जैसी बातें स्पष्ट होती हैं।

शुरुआत उन प्रश्न से करें जिनका शीर्षक आपके सवाल या उद्देश्य से सबसे अधिक मेल खाता है।

पढ़ते समय विधि, महत्व, समय और सावधानियों जैसे अलग-अलग पहलुओं को नोट करें, क्योंकि ये अक्सर अलग प्रविष्टियों में बँटे होते हैं।

अगर एक पेज से पूरा उत्तर न मिले, तो उसी संग्रह के अगले लेख या प्रश्न खोलकर संदर्भ पूरा करें।