विस्तृत उत्तर
शिवनिर्णय रत्नाकर ग्रंथ एक स्पष्ट पदानुक्रम स्थापित करता है:
मृदा कोटिगुणं सवर्णम् स्वर्णात् कोटिगुणं मणे:।
मणात् कोटिगुणं बाणो वनत्कोतिगुनं रसः॥
रसात्परतरं लिङ्गं न् भूतो न भविष्यति॥
- ▸मिट्टी या पाषाण (पत्थर) से करोड़ गुना अधिक फल स्वर्ण (सोने) के शिवलिंग के पूजन से मिलता है।
- ▸स्वर्ण से करोड़ गुना अधिक फल मणि (रत्न) से निर्मित लिंग के पूजन से मिलता है।
- ▸मणि से करोड़ गुना अधिक फल बाणलिंग (नर्मदेश्वर) के पूजन से मिलता है।
- ▸और बाणलिंग से भी करोड़ गुना अधिक फल 'रस' अर्थात् पारद से निर्मित शिवलिंग के पूजन से प्राप्त होता है।
पारद शिवलिंग समस्त शिवलिंगों में सर्वोच्च स्थान पर है।





