विस्तृत उत्तर
अनेक पुराणों और तंत्र ग्रंथों ने एकमत से पारद शिवलिंग के पूजन को धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष का प्रदाता बताया है।
स्कंद पुराण के अनुसार, जो फल सहस्त्र (हजार) करोड़ शिवलिंगों का पूजन करने पर प्राप्त होता है, वह अतुलनीय फल पारद शिवलिंग के 'दर्शन मात्र' से साधक को मिल जाता है।
रसार्णव तंत्र स्पष्ट घोषणा करता है: 'धर्मार्थकाममोक्षाख्या पुरुषार्थश्चतुर्विधा:। सिद्ध्यन्ति नात्र सन्देहो रसराजप्रसादत:' अर्थात् रसराज (पारद) की कृपा से धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष — इन चारों प्रकार के पुरुषार्थों की सिद्धि होती है, इसमें लेशमात्र भी संदेह नहीं है।
वायवीय संहिता के अनुसार आयु, आरोग्य, ऐश्वर्य तथा अन्य जो भी अभिलाषाएं हैं, वे सभी 'रसलिंग' के पूजन से सहज ही प्राप्त हो जाती हैं।
शिवनिर्णय रत्नाकर कहता है: 'रसात्परतरं लिङ्गं न् भूतो न भविष्यति' — पारद से श्रेष्ठ शिवलिंग न तो भूतकाल में हुआ है और न ही भविष्य में होगा।





