विस्तृत उत्तर
हाँ, नीलकंठ अघोरास्त्र स्तोत्र के पाठ से दुष्ट भूत, प्रेत और पिशाच भाग जाते हैं।
स्तोत्र के भूत-प्रेत-डाकिनी शमन खंड में, भगवान को बारह प्रकार के भूत, तेरह-सोलह प्रकार के प्रेत, और पंद्रह प्रकार की डाकिनी-शाकिनी को 'हन हन' (मार डालने) और 'दहन' (जलाने) का निर्देश देते हुए उनका आह्वान किया जाता है।
साधक को सभी प्रकार के ग्रह दोषों, तंत्र-मंत्र की बाधाओं और मृत्यु भय से मुक्ति मिलती है।





