विस्तृत उत्तर
नीलकंठ अघोरास्त्र स्तोत्र का सर्वोच्च फल है: मनसा चिंतितम् जपने के साथ ही, शिवलोकं स गच्छति — साधक मृत्यु के पश्चात शिवलोक को प्राप्त होता है।
यह इस उग्र तांत्रिक स्तोत्र के अंतिम सात्विक और मोक्षदायक उद्देश्य को स्थापित करता है।
इस प्रकार, यह स्तोत्र साधक को सभी प्रकार के संकटों से मुक्ति दिलाकर मोक्ष के मार्ग पर अग्रसर करता है।





