विस्तृत उत्तर
स्कंद पुराण काशी खंड (अध्याय ५३-५४) में घंटाकर्ण हृद में स्नान और घनकर्णेश्वर के दर्शन की तीन अत्यंत दुर्लभ फलश्रुतियाँ वर्णित हैं —
पहली — गर्भ-वास से मुक्ति: 'वाराणसी में महोदरेश्वर और घंटाकर्णेश्वर के दर्शन करने वाला कभी पुनः माता के गर्भ में प्रवेश नहीं करता।' अर्थात् जन्म-मृत्यु चक्र का अंत — कैवल्य मोक्ष।
दूसरी — कहीं भी मरे तो काशी-मरण का पुण्य: 'घंटाकर्ण हृद में स्नान कर व्यासेश्वर का दर्शन करने वाला यदि विश्व में कहीं भी मरता है, तो उसे काशी में मरने का पुण्य प्राप्त होता है।' शिव उसे काशी-मरण का तारक ज्ञान और मोक्ष प्रदान करते हैं।
तीसरी — सात पीढ़ियों के पितरों का उद्धार: 'इस तीर्थ पर विधिवत श्राद्ध करने वाला सात पूर्वजों का उद्धार करता है, भले ही वे नरक में हों।' पुराण कहता है — पितर स्वयं कामना करते हैं कि कोई वंशज घंटाकर्ण तीर्थ के जल से तिलांजलि अर्पित करे।





