विस्तृत उत्तर
घंटाकर्ण हृद (स्थानीय नाम — कर्णघंटा तालाब) काशी में घंटाकर्णेश्वर महादेव के शिवलिंग के ठीक समीप स्थित पवित्र तीर्थ कुंड है। स्कंद पुराण काशी खंड (अध्याय ५३-५४) के अनुसार, शिवगण घंटाकर्ण ने शिवलिंग स्थापना के बाद उसके अभिषेक और ध्यान-साधना हेतु स्वयं अपने हाथों से इस कुंड का खनन किया।
इस कुंड का सबसे रहस्यमयी महत्त्व यह है कि स्कंद पुराण कहता है — 'आज भी, यदि कोई साधक इस कुंड के जल में डुबकी लगाकर एक क्षण के लिए पूर्णतः एकाग्र हो जाए, तो उसे साक्षात् श्री काशी विश्वनाथ की महा-आरती के घंटों की दिव्य ध्वनि सुनाई देती है।'
इसका अर्थ है कि घंटाकर्णेश्वर और विश्वनाथ के गर्भगृह के बीच एक सूक्ष्म 'नाद-सेतु' विद्यमान है। साधक की श्रवण-शक्ति इतनी सूक्ष्म हो जाती है कि वह भौतिक दूरी पार कर विश्वनाथ के दरबार का नाद ग्रहण कर लेता है।
यह कुंड वाराणसी में K 60/67 पर स्थित है।





