विस्तृत उत्तर
हाँ, शनि उपासना की जड़ें अत्यंत गहरी और शास्त्र-सम्मत हैं। इसका वर्णन कई प्रमुख ग्रंथों में मिलता है: स्कंद पुराण में शनि प्रदोष और पिप्पलाद आख्यान का वर्णन है। पद्म पुराण में राजा दशरथ और शनि देव के संवाद तथा 'दशरथ कृत शनि स्तोत्र' का उल्लेख है। भविष्य पुराण में शनि व्रत की विधि और भगवान नृसिंह की स्तुति है। ब्रह्मवैवर्त पुराण में शनि को श्रीकृष्ण का परम भक्त बताया गया है। इसके अतिरिक्त, धर्मसिंधु, निर्णयसिंधु, मुहूर्त चिंतामणि और 'व्रतराज' जैसे प्रामाणिक धर्मशास्त्रों में शनिवार व्रत के नियम, उद्यापन विधि, और वर्जनाओं (जैसे लोहा क्रय निषेध) का विस्तृत संकलन है। अतः यह व्रत सनातन परंपरा का अभिन्न अंग है।

