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शास्त्रीय प्रमाण प्रश्नोत्तर — 4 प्रश्न

शास्त्रीय प्रमाण से जुड़े 4 प्रामाणिक प्रश्नोत्तर पढ़ें। शास्त्रों और पुराणों पर आधारित उत्तर एक ही जगह मिलेंगे।

कुल 4 प्रश्न

सत्यनारायण व्रत का उल्लेख किस पुराण में मिलता है?

इस व्रत का मुख्य उल्लेख 'स्कंद पुराण' के 'रेवा खंड' और 'भविष्य पुराण' के 'प्रतिसर्ग पर्व' में मिलता है, जहाँ भगवान विष्णु स्वयं देवर्षि नारद को इस व्रत की महिमा बताते हैं।

स्कंद पुराणरेवा खंडभविष्य पुराण
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क्या शनिवार व्रत का वर्णन पुराणों और शास्त्रों में है?

हाँ, इसका वर्णन स्कंद पुराण, पद्म पुराण, भविष्य पुराण, धर्मसिंधु और निर्णयसिंधु जैसे प्रामाणिक ग्रंथों में मिलता है।

शास्त्र प्रमाणस्कंद पुराणदशरथ स्तोत्र
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क्या शास्त्रों में शनिवार काली पूजा है?

तंत्र शास्त्रों में शनिवार का नहीं बल्कि अमावस्या का महत्व है। लेकिन ज्योतिष शास्त्रों में शनि के दोष दूर करने के लिए शनिवार को काली पूजा का स्पष्ट विधान है।

तंत्र शास्त्रज्योतिषशास्त्र प्रमाण
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शनिवार को काली पूजा क्यों करते हैं?

शनिदेव काल और कर्म के देवता हैं, जबकि काली माता स्वयं 'काल' की स्वामिनी हैं। इसलिए शनि के प्रकोप को शांत करने के लिए शनिवार को काली माता की पूजा की जाती है।

शनिवार पूजाग्रह शांतिकाली और शनि
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शास्त्रीय प्रमाण — शास्त्रीय प्रश्नोत्तर संग्रह

पौराणिक पर शास्त्रीय प्रमाण श्रेणी में आपको सनातन धर्म, वेद, पुराण और शास्त्रों पर आधारित प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर विद्वानों द्वारा शास्त्रीय प्रमाणों सहित तैयार किया गया है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत उत्तर पढ़ें। अन्य विषयों के लिए प्रश्नोत्तरी मुख्य पृष्ठ देखें।

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शास्त्रीय प्रमाण को गहराई से समझने का तरीका

शास्त्रीय प्रमाण प्रश्नोत्तर पेज छोटे उत्तरों को एक साथ रखता है, इसलिए इसे त्वरित समाधान और आगे पढ़ने के प्रवेश-द्वार दोनों की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है।

4 प्रश्न वाले इस पेज पर सबसे अच्छा तरीका यह है कि पहले वही प्रविष्टियाँ पढ़ें जो आपके वर्तमान सवाल से सीधा संबंध रखती हैं, फिर उनसे जुड़े अगले लेख या प्रश्न खोलें ताकि आधी-अधूरी जानकारी के बजाय पूरा संदर्भ बने।

अगर आपको किसी उत्तर का छोटा रूप मिल रहा है, तो उसी विषय के अगले प्रश्न और संबंधित विस्तृत लेख भी देखें। इससे नियम, अपवाद, समय, विधि और शास्त्रीय आधार जैसी बातें स्पष्ट होती हैं।

शुरुआत उन प्रश्न से करें जिनका शीर्षक आपके सवाल या उद्देश्य से सबसे अधिक मेल खाता है।

पढ़ते समय विधि, महत्व, समय और सावधानियों जैसे अलग-अलग पहलुओं को नोट करें, क्योंकि ये अक्सर अलग प्रविष्टियों में बँटे होते हैं।

अगर एक पेज से पूरा उत्तर न मिले, तो उसी संग्रह के अगले लेख या प्रश्न खोलकर संदर्भ पूरा करें।