ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण

पारण विधि प्रश्नोत्तर — 5 प्रश्न

पारण विधि से जुड़े 5 प्रामाणिक प्रश्नोत्तर पढ़ें। शास्त्रों और पुराणों पर आधारित उत्तर एक ही जगह मिलेंगे।

कुल 5 प्रश्न

योगिनी एकादशी व्रत खोलने (पारण) का सही समय क्या है?

व्रत हमेशा अगले दिन (द्वादशी को) 'हरि वासर' (शुरुआती समय) बीतने के बाद सुबह खोलना चाहिए। व्रत खोलने से पहले ब्राह्मण को भोजन कराना और दान देना शुभ होता है।

पारण का समयहरि वासरद्वादशी
पूरा उत्तर पढ़ें →

पारण के समय चावल खाना क्यों शुभ माना जाता है?

जो चावल एकादशी को पाप माना जाता है, वही द्वादशी को पारण के समय भगवान का 'प्रसाद' बन जाता है। इसलिए व्रत खोलते समय चावल खाना बहुत शुभ होता है।

पारण में चावलव्रत पूर्णताप्रसाद
पूरा उत्तर पढ़ें →

एकादशी व्रत खोलने (पारण) का सही समय क्या है?

व्रत हमेशा अगले दिन (द्वादशी को) 'हरि वासर' (शुरुआती समय) बीतने के बाद सुबह के समय ही खोलना चाहिए। दोपहर के समय व्रत नहीं खोलना चाहिए।

पारण का समयहरि वासरद्वादशी
पूरा उत्तर पढ़ें →

एकादशी व्रत खोलने (पारण) का सही समय और नियम क्या है?

व्रत अगले दिन (द्वादशी) हरि वासर बीतने के बाद खोलना चाहिए। व्रत खोलने से पहले ब्राह्मण को भोजन कराना चाहिए। व्रत हमेशा 'चावल' खाकर खोलना चाहिए, क्योंकि द्वादशी को चावल भगवान का प्रसाद बन जाता है।

पारण का समयहरि वासरचावल का प्रसाद
पूरा उत्तर पढ़ें →

एकादशी का व्रत कैसे खोलें (पारण का समय) और 'हरिवासर' का नियम क्या है?

व्रत अगले दिन (द्वादशी) की सुबह सूरज निकलने के बाद ही खोलना चाहिए। द्वादशी के शुरुआती समय ('हरिवासर') में व्रत नहीं खोलते। व्रत खोलने के लिए चरणामृत और तुलसी का इस्तेमाल करना चाहिए।

पारण का समयहरिवासरव्रत खोलना
पूरा उत्तर पढ़ें →

पारण विधि — शास्त्रीय प्रश्नोत्तर संग्रह

पौराणिक पर पारण विधि श्रेणी में आपको सनातन धर्म, वेद, पुराण और शास्त्रों पर आधारित प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर विद्वानों द्वारा शास्त्रीय प्रमाणों सहित तैयार किया गया है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत उत्तर पढ़ें। अन्य विषयों के लिए प्रश्नोत्तरी मुख्य पृष्ठ देखें।

विषय को सही क्रम से पढ़ें

पारण विधि को गहराई से समझने का तरीका

पारण विधि प्रश्नोत्तर पेज छोटे उत्तरों को एक साथ रखता है, इसलिए इसे त्वरित समाधान और आगे पढ़ने के प्रवेश-द्वार दोनों की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है।

5 प्रश्न वाले इस पेज पर सबसे अच्छा तरीका यह है कि पहले वही प्रविष्टियाँ पढ़ें जो आपके वर्तमान सवाल से सीधा संबंध रखती हैं, फिर उनसे जुड़े अगले लेख या प्रश्न खोलें ताकि आधी-अधूरी जानकारी के बजाय पूरा संदर्भ बने।

अगर आपको किसी उत्तर का छोटा रूप मिल रहा है, तो उसी विषय के अगले प्रश्न और संबंधित विस्तृत लेख भी देखें। इससे नियम, अपवाद, समय, विधि और शास्त्रीय आधार जैसी बातें स्पष्ट होती हैं।

शुरुआत उन प्रश्न से करें जिनका शीर्षक आपके सवाल या उद्देश्य से सबसे अधिक मेल खाता है।

पढ़ते समय विधि, महत्व, समय और सावधानियों जैसे अलग-अलग पहलुओं को नोट करें, क्योंकि ये अक्सर अलग प्रविष्टियों में बँटे होते हैं।

अगर एक पेज से पूरा उत्तर न मिले, तो उसी संग्रह के अगले लेख या प्रश्न खोलकर संदर्भ पूरा करें।