विस्तृत उत्तर
एकादशी व्रत का पारण (व्रत खोलना) हमेशा अगले दिन 'द्वादशी तिथि' के समाप्त होने से पहले किया जाना चाहिए। पारण के समय सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि द्वादशी तिथि का प्रथम चतुर्थांश यानी 'हरि-वासर' बीत चुका हो। हरि-वासर में व्रत खोलना वर्जित है। इसके साथ ही दोपहर के समय भी व्रत का पारण करना शास्त्रों में मना किया गया है। पारण से पहले ब्राह्मणों को भोजन या दान देना चाहिए।


