विस्तृत उत्तर
राजा अम्बरीष की कथा में जल पीना एक सूक्ष्म पारण उपाय के रूप में बताया गया है। जब द्वादशी का समय समाप्त होने वाला था और दुर्वासा ऋषि लौटे नहीं थे, तब ब्राह्मणों ने धर्मशास्त्र के आधार पर कहा कि जल ग्रहण करना भोजन करने जैसा भी है और नहीं भी। इसलिए जल पीने से व्रत का पारण हो जाएगा, पर अन्न न लेने के कारण अतिथि से पहले भोजन करने का दोष नहीं लगेगा। इसीलिए अम्बरीष ने केवल जल का आचमन किया। आज भी एकादशी पारण में समय, नियम और आचार्य की सलाह का महत्व माना जाता है।
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