विस्तृत उत्तर
एकादशी पारण का समय निकलने की स्थिति धर्मशास्त्र में गंभीर मानी जाती है, इसलिए पहले से पंचांग देखकर पारण करना चाहिए। राजा अम्बरीष की कथा में ऐसा धर्मसंकट आया कि अतिथि दुर्वासा लौटे नहीं और द्वादशी समाप्त हो रही थी। विद्वान ब्राह्मणों ने उन्हें केवल जल ग्रहण करने का उपाय बताया, क्योंकि जल को भोजन और अभोजन दोनों के बीच माना गया। यह कथा सामान्य नियम का विकल्प नहीं, बल्कि विशेष धर्मसंकट का उदाहरण है। आज ऐसी स्थिति में अपने संप्रदाय, गुरु या योग्य पंडित से परामर्श लेकर पारण करना उचित माना जाता है।
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