विस्तृत उत्तर
एकादशी के दिन चावल खाना जहाँ घोर पाप माना गया है, वहीं अगले दिन (द्वादशी को) पारण के समय चावल खाना अत्यंत अनिवार्य और शुभ माना गया है। द्वादशी को भगवान को चावल का भोग लगाकर उसे 'प्रसाद' रूप में ग्रहण करने से व्रत पूर्ण होता है। भोजन पूर्णतः सात्विक होना चाहिए और एक खास नियम यह भी है कि पारण करने के पश्चात (भोजन करने के बाद) भी उस दिन दिन में सोना वर्जित है।
