विस्तृत उत्तर
सत्यनारायण पूजा का विशिष्ट नैवेद्य 'सपाद भक्ष्य' कहलाता है। 'स-पाद' का अर्थ है 1.25 (एक और एक चौथाई)। यह मात्रा प्रतीक है कि भक्त अपनी क्षमता से थोड़ा अधिक (Abundance/पूर्णता) अर्पण कर रहा है। इसमें 5 मुख्य सामग्रियां होती हैं: 1. गोधूम चूर्ण (गेहूं का आटा/सूजी), 2. गो-दुग्ध (गाय का दूध), 3. घृत (गाय का घी), 4. शर्करा (चीनी/गुड़), 5. कदली फल (केला)।
उत्तर/पश्चिम भारत में इसे भूनकर 'पंजिरी' या 'शीरा' (हलवा) के रूप में बनाया जाता है। जबकि बंगाल/ओडिशा में इसे 'शिन्नी' (कच्चा घोल) कहा जाता है। प्रसाद चढ़ाते समय "नैवेद्यं गृह्यतां देव भक्तिं मे ह्यचलां कुरु..." मंत्र पढ़ना चाहिए।





