विस्तृत उत्तर
पूजा में भगवान को अर्पित किए गए फूल — जब वे पुराने हो जाएं — उनका उचित विसर्जन करना भगवान के प्रति सम्मान का प्रतीक है। इन्हें कभी कूड़े में नहीं फेंकना चाहिए क्योंकि ये भगवान को समर्पित होने के बाद पूजनीय हो जाते हैं।
सबसे उत्तम उपाय यह है कि इन फूलों को किसी बहती हुई नदी या पवित्र जलाशय में प्रवाहित कर दें। यदि नदी पास न हो तो पीपल, तुलसी या बड़ के वृक्ष की जड़ में रख दें — इन पेड़ों को शास्त्र में देव-निवास माना गया है। विसर्जित फूलों को किसी शुद्ध और साफ स्थान पर मिट्टी में दबाया भी जा सकता है।
सड़े या मुरझाए फूल बहुत देर तक मंदिर में नहीं रखने चाहिए, क्योंकि वे नकारात्मक ऊर्जा उत्पन्न करते हैं। फूलों को गली, सड़क या कूड़े के ढेर में न फेंकें। बड़े त्योहारों के बाद यदि फूल अधिक मात्रा में हों तो उन्हें एकत्र करके बागों या खेतों में खाद के रूप में डाला जा सकता है — यह भी पर्यावरण के प्रति एक सम्मानजनक उपाय है।





