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पूजा विधि एवं नियम प्रश्नोत्तर — 16 प्रश्न

पूजा विधि एवं नियम से जुड़े 16 प्रामाणिक प्रश्नोत्तर पढ़ें। शास्त्रों और पुराणों पर आधारित उत्तर एक ही जगह मिलेंगे।

कुल 16 प्रश्न

पूजा में शंख बजाने की सही विधि क्या है?

पूजा में शंख बजाने से पहले विष्णु का ध्यान करें, फिर एक बार में तीन बार बजाएं। शिव पूजा में शंख न बजाएं। बजाने और जल अर्पण के लिए अलग-अलग शंख का उपयोग करें।

शंखशंखनादपूजा विधि
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घर में शंख रखने के नियम क्या हैं?

शंख को पूजाघर के ईशान कोण में, लाल-पीले वस्त्र पर रखें। बजाने और जल अर्पण के लिए अलग-अलग शंख रखें। दक्षिणावर्ती शंख केवल पूजा के लिए है। शिव पूजा में शंख न बजाएं, न उससे जल चढ़ाएं।

शंखवास्तुघर में शंख
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मूर्ति का मुख किस दिशा में होना चाहिए?

मूर्ति का मुख प्रायः पश्चिम दिशा में हो, ताकि पूजा करने वाले का मुख पूर्व में रहे। पूजाघर घर के उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) में सर्वोत्तम होता है। अलग-अलग देवताओं के लिए दिशाएं भिन्न हो सकती हैं।

मूर्ति दिशावास्तुपूजाघर
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टूटी मूर्ति घर में रखनी चाहिए या नहीं?

नहीं, टूटी मूर्ति घर या पूजाघर में नहीं रखनी चाहिए। इसे नदी में विसर्जित करें और नई मूर्ति स्थापित करें। शिवलिंग अपवाद है — वह टूटने के बाद भी पूजनीय रहता है।

खंडित मूर्तिवास्तुपूजाघर
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देव प्रतिमा टूट जाए तो क्या करें?

खंडित मूर्ति को पूजाघर से हटाएं, बहते जल में विसर्जित करें और नई मूर्ति स्थापित करें। मूर्ति कूड़े में न फेंकें। शिवलिंग टूटने पर अपवाद है — उसे खंडित नहीं माना जाता।

मूर्तिखंडित मूर्तिदेव प्रतिमा
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पूजा सामग्री को कूड़े में फेंक सकते हैं क्या?

नहीं, पूजा सामग्री कूड़े में नहीं फेंकनी चाहिए। फूल-पत्ते नदी में या पेड़ की जड़ में, राख तुलसी में, प्रसाद पशु-पक्षियों को, और पुराने चित्र पवित्र अग्नि में विसर्जित करें।

पूजा सामग्रीविसर्जनअपशकुन
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भगवान के विसर्जित फूल कहाँ डालें?

भगवान के विसर्जित फूल नदी में प्रवाहित करें, पीपल या तुलसी की जड़ में रखें, या पवित्र भूमि में दबाएं। कूड़े में नहीं फेंकें — ये देव-अर्पित होने के बाद पूजनीय हो जाते हैं।

पूजा फूलविसर्जनप्रसाद
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पूजा के बाद आरती का जल कहाँ डालें?

पूजा और आरती का जल तुलसी के पौधे में, पीपल की जड़ में या पवित्र नदी में डालें। इसे नाली या अपवित्र स्थान में न बहाएं। चरणामृत प्रसाद रूप में ग्रहण करना सर्वोत्तम है।

आरतीपूजा जलगंगाजल
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पंचामृत अभिषेक के बाद क्या करें?

अभिषेक के बाद मूर्ति को गंगाजल से धोएं, पोंछें और पुनः पूजन करें। पंचामृत को दोनों हाथों में लेकर शीश से लगाकर प्रसाद ग्रहण करें और भक्तों में वितरित करें। इसे नाली में न बहाएं।

पंचामृतअभिषेकप्रसाद
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पूजा में पंचामृत क्या होता है और कैसे बनाएं?

पंचामृत — दूध, दही, घी, शहद और मिश्री — इन पाँचों को मिलाकर बनाया जाता है। अंत में तुलसी डालें। यह देव-अभिषेक के लिए प्रयोग होता है और बाद में प्रसाद स्वरूप ग्रहण किया जाता है।

पंचामृतअभिषेकपूजा सामग्री
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पूजा में नैवेद्य के नियम क्या हैं?

नैवेद्य सात्विक, ताजा, और स्वच्छता से बना हो। बनाते समय चखें नहीं। भगवान के सामने ध्यान से अर्पित करें, आचमन जल दें, फिर प्रसाद लें। बासी या अशुद्ध भोग न चढ़ाएं।

नैवेद्यभोगपूजा नियम
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देवी को सिंदूर चढ़ाते हैं क्या?

हाँ, देवी को सिंदूर अर्पित करते हैं। विशेष रूप से मां दुर्गा को सिंदूर बहुत प्रिय है। नवरात्रि में 'सिंदूर खेला' की परंपरा इसी भाव से है। देवी की माँग या मस्तक पर सिंदूर लगाना उनके सौभाग्यस्वरूप का सम्मान है।

देवी पूजासिंदूरकुमकुम
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पूजा में कुमकुम और रोली में क्या अंतर है?

कुमकुम और रोली दोनों हल्दी और चूने के मिश्रण से बनते हैं और लाल होते हैं। दोनों पूजा में तिलक और देव-अर्पण के लिए उपयोगी हैं। सिंदूर इनसे अलग है — वह सिर्फ सुहागिनें मांग में लगाती हैं।

कुमकुमरोलीपूजा सामग्री
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एकादशी पर तुलसी पूजा कैसे करें?

एकादशी पर तुलसी के पत्ते न तोड़ें, जल न चढ़ाएं। एक दिन पहले दशमी को पत्ते तोड़कर रख लें। एकादशी पर दीपक जलाकर, धूप-पूजन करके, तुलसी स्तुति और विष्णु ध्यान के साथ पूजा करें।

एकादशीतुलसी पूजातुलसी विधि
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रविवार को तुलसी नहीं तोड़नी चाहिए क्यों?

रविवार को माता तुलसी भगवान विष्णु के लिए निर्जला व्रत रखती हैं, इसलिए उस दिन पत्ते तोड़ना या जल चढ़ाना उनके व्रत को खंडित करना माना जाता है। विष्णु पुराण में यह स्पष्ट वर्जित है।

तुलसीरविवारतुलसी नियम
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तुलसी के पत्ते तोड़ने का सही समय क्या है?

सूर्योदय से सूर्यास्त के बीच, स्नान के बाद, उंगलियों के पोर से, हाथ जोड़कर प्रार्थना करके तुलसी पत्ते तोड़ें। रविवार, एकादशी, ग्रहण, संध्याकाल और मृत्यु-सूतक में पत्ते तोड़ना वर्जित है।

तुलसीतुलसी पत्तेपूजा नियम
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पूजा विधि एवं नियम — शास्त्रीय प्रश्नोत्तर संग्रह

पौराणिक पर पूजा विधि एवं नियम श्रेणी में आपको सनातन धर्म, वेद, पुराण और शास्त्रों पर आधारित प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर विद्वानों द्वारा शास्त्रीय प्रमाणों सहित तैयार किया गया है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत उत्तर पढ़ें। अन्य विषयों के लिए प्रश्नोत्तरी मुख्य पृष्ठ देखें।

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पूजा विधि एवं नियम को गहराई से समझने का तरीका

पूजा विधि एवं नियम प्रश्नोत्तर पेज छोटे उत्तरों को एक साथ रखता है, इसलिए इसे त्वरित समाधान और आगे पढ़ने के प्रवेश-द्वार दोनों की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है।

16 प्रश्न वाले इस पेज पर सबसे अच्छा तरीका यह है कि पहले वही प्रविष्टियाँ पढ़ें जो आपके वर्तमान सवाल से सीधा संबंध रखती हैं, फिर उनसे जुड़े अगले लेख या प्रश्न खोलें ताकि आधी-अधूरी जानकारी के बजाय पूरा संदर्भ बने।

अगर आपको किसी उत्तर का छोटा रूप मिल रहा है, तो उसी विषय के अगले प्रश्न और संबंधित विस्तृत लेख भी देखें। इससे नियम, अपवाद, समय, विधि और शास्त्रीय आधार जैसी बातें स्पष्ट होती हैं।

शुरुआत उन प्रश्न से करें जिनका शीर्षक आपके सवाल या उद्देश्य से सबसे अधिक मेल खाता है।

पढ़ते समय विधि, महत्व, समय और सावधानियों जैसे अलग-अलग पहलुओं को नोट करें, क्योंकि ये अक्सर अलग प्रविष्टियों में बँटे होते हैं।

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