विस्तृत उत्तर
पूजा में शंख बजाना एक पवित्र कार्य है जो नकारात्मक ऊर्जा को दूर करता है, वातावरण शुद्ध करता है और देव-आह्वान का संकेत होता है। ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार शंख में वरुण, ब्रह्मा और गंगा का वास है।
शंख बजाने की सही विधि: पूजा से पहले स्नान कर शुद्ध होकर बैठें। शंख बजाने से पहले भगवान विष्णु का ध्यान करें — यह अनिवार्य माना गया है। शंख को हमेशा एक साथ तीन बार बजाएं। बिना किसी धार्मिक कार्य के शौकिया या अभ्यास के लिए भी शंख बजाना हो तो पूजा से पहले या बाद में ही बजाएं। पूजा के समय शंख की ध्वनि प्रातःकाल और संध्याकाल — दोनों समय अत्यंत शुभ होती है।
निषेध: भगवान शिव की पूजा में शंख बजाना पूर्णतः वर्जित है — शिव पूजा में शंखनाद नहीं होता। शंख से शिवलिंग पर जल भी नहीं चढ़ाना चाहिए। जो शंख बजाने के लिए प्रयोग होता है, उससे भगवान को जल नहीं चढ़ाना चाहिए — ये दोनों कार्य अलग-अलग शंख से होते हैं। बीमार व्यक्ति के कमरे में शंख न बजाएं। पूजा के बाद शंख को गंगाजल से धोकर रखें।





