विस्तृत उत्तर
घर के पूजाघर में मूर्ति की स्थापना के लिए वास्तुशास्त्र और धर्मशास्त्र दोनों में स्पष्ट दिशा-निर्देश बताए गए हैं।
सबसे महत्वपूर्ण सिद्धांत यह है कि पूजाघर घर के उत्तर-पूर्व (ईशान) कोण में हो — यह दिशा सर्वाधिक शुभ मानी जाती है। मूर्ति का मुख पश्चिम दिशा की ओर होना चाहिए ताकि पूजा करने वाले का मुख पूर्व दिशा में रहे, जो सूर्योदय की दिशा होने से सर्वशुभ है। वैकल्पिक रूप से मूर्ति का मुख पूर्व दिशा में हो और भक्त पश्चिम मुख होकर बैठे — यह भी शुभ माना गया है।
विभिन्न देवताओं के लिए विशेष नियम: गणेश, लक्ष्मी, कुबेर — उत्तर दिशा में, मुख दक्षिण की ओर। हनुमान जी — दक्षिण दिशा में या उत्तर-पूर्व में, उत्तर मुखी। ब्रह्मा, विष्णु, महेश — पूर्व दिशा में, पश्चिम मुखी। मूर्ति का आकार घर के लिए 3 से 9 इंच उचित माना जाता है — बहुत बड़ी मूर्ति मंदिर के लिए होती है। मूर्तियाँ जमीन पर नहीं रखनी चाहिए — मंदिर की ऊँचाई इतनी हो कि भगवान के चरण कम से कम छाती की ऊँचाई पर हों।





