विस्तृत उत्तर
असितांग भैरव अष्ट भैरवों में तृतीय स्थान पर आते हैं और उन्हें पूर्व दिशा का संरक्षक (दिक्पाल) माना जाता है।
अष्ट भैरवों में असितांग भैरव का स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण है, जिनका संबंध ज्ञान, सृजनात्मकता और शाप-निवृत्ति से है।
असितांग भैरव अष्ट भैरवों में तृतीय स्थान पर हैं — वे पूर्व दिशा के संरक्षक (दिक्पाल) हैं और ज्ञान, सृजनात्मकता तथा शाप-निवृत्ति से संबंधित हैं।
असितांग भैरव अष्ट भैरवों में तृतीय स्थान पर आते हैं और उन्हें पूर्व दिशा का संरक्षक (दिक्पाल) माना जाता है।
अष्ट भैरवों में असितांग भैरव का स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण है, जिनका संबंध ज्ञान, सृजनात्मकता और शाप-निवृत्ति से है।
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