विस्तृत उत्तर
शिव के भैरव रूप उनके उग्र और रक्षक स्वरूप हैं। शास्त्रों में 8 प्रमुख भैरव (अष्ट भैरव) और उनके 8-8 उपभैरवों सहित कुल 64 भैरव वर्णित हैं।
अष्ट भैरव (8 प्रमुख)
- 1असितांग भैरव 2. रुरु भैरव 3. चण्ड भैरव 4. क्रोध भैरव 5. उन्मत्त भैरव 6. कपालि भैरव 7. भीषण भैरव 8. संहार भैरव
प्रत्येक भैरव के 8 उपभैरव = 8 × 8 = 64 भैरव
महत्वपूर्ण चेतावनी
64 भैरवों की विशिष्ट उपासना तांत्रिक श्रेणी में आती है और यह अत्यंत गोपनीय, कठोर नियमों वाली साधना है। बिना दीक्षित गुरु के यह साधना कदापि नहीं करनी चाहिए।
सामान्य भक्तों के लिए भैरव उपासना
- 1काल भैरव पूजा (सबसे प्रचलित):
- ▸कालाष्टमी (प्रत्येक कृष्ण अष्टमी) पर काल भैरव की पूजा।
- ▸मंत्र: 'ॐ ह्रीं बटुकाय आपदुद्धारणाय कुरु कुरु बटुकाय ह्रीं ॐ नमः'
- ▸काशी (वाराणसी) में काल भैरव मंदिर सबसे प्रसिद्ध।
- 1बटुक भैरव पूजा:
- ▸भय निवारण, शत्रु नाश, रक्षा के लिए।
- ▸अपेक्षाकृत सौम्य भैरव रूप।
- 1भैरवाष्टमी (मार्गशीर्ष कृष्ण अष्टमी):
- ▸वर्ष का सबसे महत्वपूर्ण भैरव पूजा दिवस।
पूजा सामग्री: काले तिल, सरसों तेल, लाल पुष्प, नारियल, मदिरा (कुछ परंपराओं में)।
64 भैरवों की समूह उपासना
यह अत्यंत दुर्लभ और कठोर साधना है। इसमें 64 भैरवों के यंत्र स्थापन, विशिष्ट मंत्र जप, और रात्रि साधना शामिल है। यह केवल सिद्ध तांत्रिक गुरु के मार्गदर्शन में ही संभव है।
[समीक्षा आवश्यक]: 64 भैरवों की विशिष्ट मंत्र विधि गुरुमुखी (गुरु से प्राप्त) है और सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी अपूर्ण हो सकती है।



