विस्तृत उत्तर
गौरीशंकर रुद्राक्ष दो प्राकृतिक रूप से जुड़े रुद्राक्ष का दाना है — यह शिव और पार्वती (गौरी-शंकर) के संयुक्त स्वरूप का प्रतीक है:
लाभ
- ▸दाम्पत्य सुख: पति-पत्नी संबंधों में मधुरता और प्रेम।
- ▸विवाह योग: अविवाहितों के लिए शीघ्र विवाह।
- ▸शिव-शक्ति संतुलन: शरीर में पुरुष-स्त्री ऊर्जा का संतुलन।
- ▸हृदय चक्र: अनाहत चक्र को सक्रिय करता है — प्रेम और करुणा।
- ▸गृहस्थ सुख: पारिवारिक शांति और समृद्धि।
पहनने की विधि
- 1सोमवार या शिवरात्रि को धारण करें।
- 2गंगाजल/कच्चे दूध से शुद्ध करें।
- 3'ॐ नमः शिवाय' 108 बार जपकर अभिमंत्रित करें।
- 4रेशमी/ऊनी धागे या सोने/चांदी में पिरोकर गले में या कलाई में पहनें।
- 5हृदय के पास (गले में) सर्वोत्तम।
सावधानी
- ▸असली गौरीशंकर रुद्राक्ष दुर्लभ है — नकली से बचें।
- ▸मांसाहार, मदिरा सेवन के समय उतार दें (कुछ परंपराओं में)।
- ▸शौचालय/अशुद्ध स्थान पर न ले जाएं।





