विस्तृत उत्तर
स्कन्दपुराण और तंत्र शास्त्रों में आठ दिशाओं के रक्षक 'अष्ट भैरव' का वर्णन है: 1. असितांग भैरव (वाहन: हंस, रचनात्मकता हेतु), 2. रुरु भैरव (वाहन: बैल, शत्रु विजय हेतु), 3. चण्ड भैरव (वाहन: मोर, आत्मविश्वास हेतु), 4. क्रोध भैरव (वाहन: गरुड़, विपत्ति नाश हेतु), 5. उन्मत्त भैरव (वाहन: घोड़ा, विकार नाश हेतु), 6. कपाल भैरव (वाहन: हाथी, कानूनी विजय हेतु), 7. भीषण भैरव (वाहन: शेर, प्रेत बाधा मुक्ति हेतु) और 8. संहार भैरव (वाहन: कुत्ता, पाप नाश हेतु)।