विस्तृत उत्तर
भगवान भैरव, जो कि परमेश्वर शिव के रौद्र एवं संहारक स्वरूप हैं, उनकी उपासना तंत्रशास्त्र में असाध्य रोगों के निवारण और कालजयी शक्ति की प्राप्ति के लिए विशिष्ट रूप से की जाती है।
अष्ट भैरवों में असितांग भैरव का स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण है, जिनका संबंध ज्ञान, सृजनात्मकता और शाप-निवृत्ति से है, जो रोग मुक्ति के तात्विक आधार को स्थापित करता है।
असितांग भैरव अष्ट भैरवों में तृतीय स्थान पर आते हैं और उन्हें पूर्व दिशा का संरक्षक (दिक्पाल) माना जाता है।





