विस्तृत उत्तर
असितांग भैरव अष्ट भैरवों में तृतीय स्थान पर आते हैं और उन्हें पूर्व दिशा का संरक्षक (दिक्पाल) माना जाता है।
इसी कारण असितांग भैरव साधना में जप करते समय साधक का मुख पूर्व दिशा की ओर होना चाहिए।
असितांग भैरव पूर्व दिशा के संरक्षक (दिक्पाल) हैं — इसीलिए उनकी साधना में जप करते समय पूर्व दिशा की ओर मुख करना चाहिए।
असितांग भैरव अष्ट भैरवों में तृतीय स्थान पर आते हैं और उन्हें पूर्व दिशा का संरक्षक (दिक्पाल) माना जाता है।
इसी कारण असितांग भैरव साधना में जप करते समय साधक का मुख पूर्व दिशा की ओर होना चाहिए।
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