विस्तृत उत्तर
हिंदू अनुष्ठानों में संकल्प का अर्थ है अपनी इच्छा-शक्ति और चेतना को एक विशिष्ट उद्देश्य के लिए केंद्रित करना।
पूर्व या उत्तर की ओर मुख करके कुशा के आसन पर बैठें। दाहिने हाथ में जल, पीले पुष्प, अक्षत और दक्षिणा लेकर पूर्ण एकाग्रता के साथ व्रत और पूजा का संकल्प लें:
यथोपलब्धपूजनसामग्रीभिः भगवत्या: सरस्वत्या: पूजनमहं करिष्ये।
अर्थात: हे परमेश्वरी, मेरे पास जो भी सात्त्विक पूजन सामग्री उपलब्ध है, उसी के माध्यम से मैं आपकी पूजा का संकल्प लेता हूँ।
तदोपरांत हाथ का जल भूमि पर छोड़ दें।
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