विस्तृत उत्तर
लघुन्यास की प्रक्रिया में साधक मानसिक रूप से देवताओं को अंगों में स्थापित करता है:
— ब्रह्मा: जननेंद्रिय में
— विष्णु: पैरों में
— हरा (शिव): हाथों में
— इन्द्र: भुजाओं में
— अग्नि: उदर (पेट) में
— शिव: हृदय में
— वसु: कंठ में
— सरस्वती: मुख में
— वायु: नासिका में
— सूर्य-चंद्र: नेत्रों में
— अश्विनी कुमार: कानों में
— महादेव: मस्तक में
इस प्रकार साधक का पूरा शरीर देवत्वमय हो जाता है।





