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विस्तृत उत्तर
मत्स्य पुराण' के अनुसार, मकर संक्रांति के व्रत और अनुष्ठान का पालन करने वाले साधक (चाहे वह पुरुष हो अथवा स्त्री) को संक्रांति से ठीक एक दिन पूर्व (अर्थात पूर्व-संध्या के दिन) मध्याह्न काल में केवल एक बार ही भोजन करना चाहिए। इस प्रक्रिया को 'एकभक्त व्रत' कहा जाता है।
इस एकभक्त नियम का मनोवैज्ञानिक और शारीरिक आधार अत्यंत सुदृढ़ है। शीत ऋतु अपने चरमोत्कर्ष पर होती है और सूर्य की ऊर्जा में संक्रमण हो रहा होता है। ऐसे में पाचन तंत्र (जठराग्नि) को संतुलित और हल्का रखने के लिए यह विधान निर्मित किया गया है।
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