विस्तृत उत्तर
मत्स्य पुराण के अनुसार पूर्णिमा पर किया गया दान 'अक्षय' होता है और हर महीने के हिसाब से अलग दान बताया गया है। जैसे- वैशाख में जल से भरा घड़ा और पंखा, आषाढ़ में अन्न और वस्त्र, कार्तिक में दीप दान (सौ यज्ञों के बराबर) और कंबल, तथा माघ पूर्णिमा पर तिल, ऊनी वस्त्र और कपास का दान अक्षय पुण्य देता है।





