विस्तृत उत्तर
पितरों को कुछ विशेष चीज़ें अत्यंत प्रिय हैं, जिनका शास्त्रों में स्पष्ट उल्लेख है। शास्त्रीय आधार के अनुसार विष्णु पुराण और मत्स्य पुराण के अनुसार पितरों को तिल, कुशा, गाय का दूध, शहद, जौ और सफेद फूल अत्यंत प्रिय हैं।
पितरों को प्रिय छह प्रमुख चीज़ें इस प्रकार हैं। पहली चीज़ है तिल, विशेष रूप से काले तिल। तिल पितरों को अत्यंत प्रिय हैं, क्योंकि इनकी उत्पत्ति साक्षात् भगवान वराह के पसीने की बूंदों से हुई है। दूसरी चीज़ है कुशा घास, जो भगवान वराह के दिव्य रोमों से उत्पन्न हुई है। तीसरी चीज़ है गाय का दूध, जो पवित्रता का प्रतीक है। चौथी चीज़ है शहद, जो मधुरता का प्रतीक है। पाँचवीं चीज़ है जौ, जो पवित्र अन्न माना जाता है। छठी चीज़ है सफेद फूल, जो शुद्धता का प्रतीक हैं।
इन सभी चीज़ों का श्राद्ध में विशेष प्रयोग होता है। पिण्ड बनाते समय इनमें से कई सामग्रियाँ डाली जाती हैं। पके हुए चावल, गाय का दूध, घी, शहद, जौ और काले तिल को मिलाकर गोलाकार पिण्ड निर्मित किए जाते हैं। तर्पण में भी कुशा और काले तिल का प्रयोग होता है। कर्ता अंजलि में शुद्ध जल, कुशा और काले तिल लेकर तर्पण करता है।
इन चीज़ों के पितरों को प्रिय होने के पीछे शास्त्रीय कारण हैं। तिल और कुशा साक्षात् नारायण के शरीर से उत्पन्न हुए हैं। तदनंतर भगवान के शरीर से उत्पन्न पसीने की बूंदों से पृथ्वी पर काले तिल की उत्पत्ति हुई, और उनके दिव्य रोमों से पवित्र कुशा घास का प्रादुर्भाव हुआ। यही कारण है कि आज तक श्राद्ध कर्म में पिण्ड, काले तिल और कुशा को सबसे अनिवार्य और पवित्र माना जाता है।
गाय का दूध और घी पवित्रता और शुद्धता के प्रतीक हैं, क्योंकि गाय को सनातन धर्म में अत्यंत पवित्र माना गया है। शहद मधुरता और तृप्ति का प्रतीक है। जौ एक पवित्र अन्न है, जिसका यज्ञों में भी प्रयोग होता है। सफेद फूल शुद्धता और पवित्रता का प्रतीक हैं, और श्राद्ध में अर्पण के लिए इन्हें विशेष माना गया है।
इसके विपरीत कुछ चीज़ें श्राद्ध में सर्वथा वर्जित हैं। शास्त्रीय निर्देश के अनुसार मसूर की दाल, काला चना, धतूरा, कदम का फूल और बकरे का दूध श्राद्ध में सर्वथा वर्जित है। इसलिए श्राद्ध करते समय केवल वही सामग्रियाँ प्रयोग करनी चाहिए जो पितरों को प्रिय हैं और शास्त्रों में अनुमत हैं। शास्त्रीय आधार के रूप में विष्णु पुराण, मत्स्य पुराण, आश्वलायन गृह्यसूत्र, गरुड़ पुराण और याज्ञवल्क्य स्मृति इस सिद्धांत के प्रामाणिक स्रोत हैं। निष्कर्षतः पितरों को तिल, कुशा, गाय का दूध, शहद, जौ और सफेद फूल अत्यंत प्रिय हैं। ये छह चीज़ें श्राद्ध में अनिवार्य रूप से प्रयोग की जाती हैं, क्योंकि इनमें से कई साक्षात् नारायण के शरीर से उत्पन्न हुई हैं, और सभी पितरों को विशेष रूप से प्रिय हैं।
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