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श्राद्ध विधि📜 गरुड़ पुराण, धर्मशास्त्र1 मिनट पठन

श्राद्ध में गाय को ग्रास देने का महत्व?

संक्षिप्त उत्तर

गाय = देवमाता (33 कोटि देव निवास)। गरुड़ पुराण: गो-ग्रास = पितर को वैतरणी नदी पार कराना। पंचबलि में गाय = देव भोग। हरा चारा/रोटी+गुड़ दें। गो-दान = सबसे बड़ा दान।

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विस्तृत उत्तर

श्राद्ध में गाय को ग्रास (भोजन) देना अत्यंत पुण्यदायक और अनिवार्य माना जाता है।

कारण

  1. 1गाय = देवमाता — गाय में 33 कोटि (प्रकार) देवताओं का वास। गो-ग्रास = सभी देवताओं को भोजन।
  2. 2वैतरणी नदी — गरुड़ पुराण अनुसार मृत्यु के बाद आत्मा को वैतरणी नदी पार करनी होती है। गो-दान/गो-ग्रास से गाय पितर को वैतरणी पार कराती है।
  3. 3पंचबलि — श्राद्ध भोजन से सबसे पहले गाय के लिए निकालना = देव भोग।
  4. 4पितरों तक भोजन — गाय = देव माध्यम — गाय को खिलाने से पितरों तक भोजन पहुँचता है (मान्यता)।

क्या दें

  • हरा चारा/घास।
  • रोटी + गुड़।
  • श्राद्ध का पहला अंश।

गो-दान: गरुड़ पुराण में मृत्यु पश्चात गो-दान (गाय दान) सबसे बड़ा दान माना गया है — पितर को मोक्ष मार्ग में सहायक।

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शास्त्रीय स्रोत
गरुड़ पुराण, धर्मशास्त्र
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