विस्तृत उत्तर
हाँ — महिलाएं पिंडदान कर सकती हैं। यह गरुड़ पुराण और धर्मशास्त्रों में स्पष्ट है।
शास्त्रीय आधार
- ▸गरुड़ पुराण (प्रेतखंड 8): अंतिम संस्कार + पिंडदान + श्राद्ध — सब में पुत्र प्रथम अधिकारी, पर पत्नी/बेटी/बहन भी कर सकती हैं (पुरुष सदस्य न हो तो)।
- ▸मनुस्मृति: पत्नी अपने पति का श्राद्ध/पिंडदान कर सकती है (संतान न हो)।
- ▸गरुड़ पुराण कहता है — *'संस्कार पुत्र से अपेक्षित, उसके अभाव में पत्नी, फिर शिष्य।'*
गया में
- ▸गया में भी महिलाएं पिंडदान करती हैं — कोई शास्त्रीय वर्जना नहीं।
आधुनिक दृष्टि
- ▸बेटा-बेटी समान — यह संवैधानिक और नैतिक दोनों सिद्धांत है।
- ▸श्रद्धा और भाव प्रधान — कौन करे यह नहीं, कैसे करे यह महत्वपूर्ण।सार: *'पितरों को श्रद्धा चाहिए, लिंग नहीं।'* जो भी सच्ची श्रद्धा से करे — पितर प्रसन्न होते हैं।





