विस्तृत उत्तर
सर्वपितृ अमावस्या (पितृ पक्ष का अंतिम दिन) को श्राद्ध करें — यह दिन सभी पितरों के श्राद्ध के लिए निर्धारित है।
शास्त्रीय विधान (verified from Zee News, Webdunia)
- ▸जिन पितरों की मृत्यु तिथि याद नहीं या भूल गए हों — उनका श्राद्ध सर्वपितृ अमावस्या (आश्विन कृष्ण अमावस्या) को करें।
- ▸इस दिन सभी पितरों (ज्ञात-अज्ञात) का श्राद्ध एक साथ किया जा सकता है।
- ▸इसे 'पितृ विसर्जनी अमावस्या' भी कहते हैं — इस दिन पितर वापस पितृलोक जाते हैं।
विशेष तिथियाँ (verified from Aaj Tak, Times Now)
- ▸पिता का श्राद्ध = अष्टमी तिथि (पितृ पक्ष)।
- ▸माता का श्राद्ध = नवमी तिथि।
- ▸अकाल मृत्यु (दुर्घटना/आत्महत्या) = चतुर्दशी तिथि।
- ▸अविवाहित = पंचमी तिथि।
- ▸सन्यासी/विधवा = द्वादशी तिथि।
सरल उपाय: तिथि याद न हो तो सर्वपितृ अमावस्या को तिल-जल से तर्पण + पिंडदान + ब्राह्मण भोजन + गो-ग्रास + कौवा ग्रास — सभी पितर तृप्त हो जाएंगे।

